22.7.17

ॐ मंत्र का वैज्ञानिक रहस्य और लाभ//Scientific secrets and benefits of "Om " mantra


अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।
ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।ॐ की सार्थकता को व्यक्त करने से पूर्व इसके अर्थ का बोध होना अत्यंत आवश्यक है. ॐ की ध्वनि संपूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त है जो जीवन की शक्ति है जिसके होने से शब्द को शक्ति प्राप्त होती है यही 'ॐ का रूप है.
ॐ का उच्चारण तीन ध्वनियों से मिलकर बना यह है इन ध्वनियों का अर्थ वेदों में व्यक्त किया गया है जिसके अनुसार इसका उच्चारण किया जाता है. ध्यान साधना करने के लिए इस शब्द को उपयोग में लाया जाता है.
सर्वत्र व्याप्त इस ध्वनि को ईश्वर के समानार्थ माना गया है यही उस निराकार अंतहीन में व्याप्त है. ॐ को जानने का अर्थ है ईश्वर को जान लेना. समस्त वेद ॐ के महत्व की व्याख्या करते हैं. अनेक विचारधाराओं में ॐ की प्रतिष्ठा को सिद्ध किया गया है.
परमात्मा की स्तुति सृष्टि, स्थिति और प्रलय का संपादन इसी ॐ में निहीत है. सत्‌ चित्‌ आनंद की अनुभूति भी इसी के द्वारा संभव है. समस्त वैदिक मंत्रों का उच्चारण ॐ द्वारा ही संपन्न होता है. वेदों की ऋचाएं, श्रुतियां ॐ के उच्चारण के बिना अधूरी हैं. भौतिक, दैविक और आध्यात्मिक शांति का सूचक मंत्र है यह ॐ. '
प्राण तत्व का उल्लेख करते हुए ॐ की ध्वनियों के साथ प्राण के सम्बन्ध को दर्शाया जाता है.
ॐ को अपनाकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है. साधना तपस्या के द्वारा ॐ का चिन्तन करके व्यक्ति अपने सहस्त्रो पापों से मुक्त हो जाता है तथा मोक्ष को प्राप्त करता है. इसे प्रणव मंत्र भी कहा जाता है. यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है और संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है इसका न आरंभ है न अंत. तपस्वी और साधक सभी इसी को अपनाते हुए प्रभु की भक्ति में स्वयं को मग्न कर पाते हैं. जो भी ॐ का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है. ऊँ शब्द अ, उ, म इन तीनों ध्वनियों से मिलकर बना है जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक भी कहा जाता है.
ॐकार बारह कलाओं से युक्त माना गया है इसकी सभी मात्राएं महत्वपूर्ण अर्थों को व्यक्त करती हैं. इसकी बारह कलाओं की मात्राओं में पहली मात्रा घोषिणी है, दूसरी मात्रा विद्युन्मात्रा, तीसरी पातंगी, चौथी वायुवेगिनी, पांचवीं नामधेया, छठी को ऐन्द्री, सातवीं वैष्णवी, आठवीं शांकरी, नौवीं महती, दसवीं धृति, ग्यारहवीं मात्रा नारी और बारहवीं मात्रा को ब्राह्मी नाम दिया गया है. ॐ को अनुभूति से युक्त करने के लिए साधक अ एवं म अक्षर को पाकर ॐ को अपने भीतर आत्मसात करता है. प्रारम्भिक अवस्था में विभिन्न ॐ स्वरों में सुनाई पड़ती है परंतु धीरे-धीरे अभ्यास द्वारा इसके भेद को समझा जा सकता है. आरंभ में यह ध्वनि समुद्र, बादलों तथा झरनों से उत्पन्न ध्वनियों जैसी सुनाई पड़ती है लेकिन बाद में यह ध्वनि नगाड़े व मृदंग के शोर की ध्वनि सुनाई पड़ती है. और अन्त में यह यह मधुर तान जैसे बांसुरी एवं वीणा जैसी सुनाई पड़ती है.
ॐ के चिन्तन मनन द्वारा समस्त परेशानियों से मुक्त हो चित को एकाग्र करके साधक भाव में समाने लगता है. इसमें लीन व्यक्ति विषय वासनाओं से दूर रहता है और परमतत्त्व का अनुभव करता है. अनेक धार्मिक क्रिया कलापों में 'ॐ' शब्द का उच्चारण होता है, जो इसके महत्व को प्रदर्शित करता है. प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ब्रह्मांड के सृजन के पहले यह मंत्र ही संपूर्ण दिशाओं में व्याप्त रहा है सर्वप्रथम इसकी ध्वनि को सृष्टि का प्रारंभ माना गया है. ॐ के महत्व को अन्य धर्मों ने भी माना है. ॐ से के उच्चारण से मन, मस्तिष्क में शांति का संचार होता है
ॐ के विविध अंगों का पूर्ण रूप से विवेचन एवं विश्लेषण किया गया है. जिसमें ॐ की मात्राएं इसकी सार्थकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है यह एक रहस्यात्मक ज्ञान है जिसे जो सहज भाव द्वारा ग्रहण कर सकता है वही परम सत्य को जान सकता है
लेकिन इन सबके अलावा ओम (ॐ) शब्द से इंसान से शारीरिक लाभ भी होते हैं...आईये जानते हैं इन मायावी शब्द के फायदे... ॐ और थायरॉयड: ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो कि थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। ॐ और घबराहट: अगर आपको घबराहट महसूस होती है तो आप आंखें बंद करके 5 बार गहरी सांसे लेते हुए ॐ का उच्चारण करें। ॐ और तनाव: यह शरीर के विषैले तत्वों को दूर करता है इसलिए तनाव को दूर करता है। बिंदी केवल एक श्रृंगार और परंपरा ही नहीं सुरक्षा कवच भी है 
ॐ के और स्वास्थ्य लाभों की बात करते हैं
ॐ और खून का प्रवाह यह हार्ट को चुस्त-दुरूस्त रखता है और खून का प्रवाह अच्छा करता है।
ॐ और थकान थकान को मिटाने के लिए इससे अच्छा उपाय कोई नहीं
ॐ और नींद नींद ना आने की समस्या इससे कुछ समय में ही दूर हो जाती है। इसलिए बेड पर जाते ही इंसान को ॐ का उच्चारण करना चाहिए।
ॐ और पाचन इसके उच्चारण से पाचन शक्ति बढ़िया होती है।
ॐ और स्फूर्ति यह शरीर में युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार करता है।
ॐ और फेफड़े इसके उच्चारण से फेफड़े दुरूस्त होते हैं।
ॐ दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।
ॐ और रीढ़ की हड्डी ऊं के उच्चारण से कंपन पैदा होता है जो रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करता है।
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