27.7.17

आग लगने पर करें ये उपाय // Measures on fire


    गर्मियों में आग लगने के मामले काफी बढ़ जाते हैं। इससे निपटने के लिए ऑफिस, मॉल, सिनेमा हॉल, बस, ट्रेन आदि में पूरे इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन घर को हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। घर में आग न लगे, इसके लिए हमें क्या करना चाहिए और अगर आग लग जाए तो उससे कैसे निपटें, एक्सपर्ट्स की मदद से बता रहे हैं
गर्मियों में नमी कम होती है और तामपान बढ़ जाता है इसलिए कोई भी चीज आसानी से आग पकड़ लेती है। इस मौसम में इलेक्ट्रिक वायर भी जल्दी गर्म हो जाते हैं और जरा-सा ज्यादा लोड पड़ने पर स्पार्क होने से आग लग जाती है। वैसे, घर में ऐसी कई चीजें होती हैं, जो आग लगने की वजह बन सकती हैं। इनका ध्यान रखना जरूरी है:

एसी:

एसी की ठीक से देखभाल न की जाए तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। एसी आमतौर पर 15 एंपियर तक करंट झेल सकता है। अच्छी तरह रखरखाव वाला एसी 12 एंपियर का करंट लेता है, जबकि अगर एसी को बिना सालाना सर्विसिंग किए चलाया जाए तो वह 18 एंपियर तक करंट लेता है।
इससे न सिर्फ वायर पर लोड बढ़ता है बल्कि ac जल भी सकता है|शॉर्ट सर्किट से घर में आग भी लग सकती है। जब न्यूट्रल, फेज और अर्थ, तीनों वायर या कोई दो वायर आपस में टच हो जाती हैं तो शार्ट सर्किट होता है।
क्या करें: एसी के लिए हमेशा एमसीबी (MCB) स्विच लगवाएं। नॉर्मल या पावर स्विच में एसी का प्लग न लगाएं। सीजन शुरू होने से पहले एसी की सर्विस जरूर कराएं। हो सके तो सीजन के बीच में भी एक बार सर्विस कराएं। जब भी सर्विस कराएं, ट्रांसफॉर्मर आदि का प्लग खुलवा कर चेक कराएं कि कहीं कोई तार ढीली तो नहीं। एसी से आग की एक बड़ी वजह तारों के ढीला होने से स्पार्क होना है। एसी या इलेक्ट्रॉनिक सॉकेट के पास पर्दा न रखें क्योंकि स्पार्क होने पर पर्दा आग पकड़ सकता है। एसी को रिमोट से बंद करने के बाद उसकी MCB को भी बंद करना चाहिए। एसी को लगातार 12 घंटे से ज्यादा न चलाएं। खिड़की-दरवाजे खोलकर एसी न चलाएं।
वायर और सर्किट: 

घर में वायरिंग कराते हुए हम पैसे बचाने के चक्कर में अक्सर सस्ती वायर डलवा देते हैं। इसके अलावा, एक बार वायरिंग कराकर हम निश्चिंत हो जाते हैं और उसे अपग्रेड नहीं कराते, जबकि वक्त के साथ घर में इलेक्ट्रिक गैजेट्स बढ़ाते जाते हैं। बड़ा टीवी, बड़ा फ्रिज, ज्यादा टन का एसी, माइक्रोवेव आदि। घर में लगी पुरानी वायर इतना लोड सहन नहीं कर पाती और शॉर्ट सर्किट हो जाता है। घरों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण यही होता है।
क्या करें: घर में हमेशा ब्रैंडेड वायर इस्तेमाल करें। सस्ती वायर खरीदने से बचें। वायर हमेशा आईएसआई मार्क वाली खरीदें और जितने एमएम की वायर की इलेक्ट्रिशियन ने सलाह दी है, उतने की ही खरीदें। घर के लिए वायर 1, 1.5, 2.5, 4, 6 और 10 एमएम की होती हैं। मीटर और सर्किट के बीच 10 एमएम की वायर, बाकी घर में पावर प्लग के लिए 4 एमएम और बाकी के लिए 2.5 एमएम की वायर लगती है। घर में पीवीसी वायर लगानी चाहिए, जो 1 लेयर की होती है। यह आसानी से गरम नहीं होती।
वायर में टॉप ब्रैंड हैं: फिनॉलेक्स, प्लाजा, आरआर आदि। अगर आप किराये पर किसी घर में आएं हैं और घर का लोड जानना चाहते हैं तो बिजली बिल से जान सकते हैं। उस पर घर का लोड दर्ज होता है। हर 5 साल में इलेक्ट्रिशन बुलाकर वायर चेक जरूर करानी चाहिए। साथ ही मेन सर्किट बोर्ड पर पूरा लोड डालने से अच्छा है कि दो बोर्ड बनाकर लोड को बांट दें। मीटर-बॉक्स भी लकड़ी के बजाय मेटल का लगवाएं। इससे आग लगने का खतरा कम हो जाता है।
दीया और अगरबत्ती: सुबह-शाम घर में पूजा करते हुए दीया और अगरबत्ती जलती छोड़ दें और उन पर ध्यान न दें तो भी आग लग सकती है।
क्या करें:

 दीया जलाकर उसके ऊपर शीशे की चिमनी रख सकते हैं, जैसी पहले लैंपों में होती थी। इससे आग लगने के चांस कम होंगे।
कम जगह, ज्यादा सामान: आजकल घर के साइज छोटे हो रहे हैं और सामान काफी ज्यादा। फर्नीचर, पर्दे और घर के दूसरे साजो-सामान भी ऐसे चलन में हैं जो जल्दी आग पकड़ते हैं। मसलन पॉलिस्टर के पर्दे, सिंथेटिक कपड़े, फोम के सोफे और गद्दे आदि।
क्या करें: 

घर में जरूरत का सामान ही रखें और फालतू चीजों को निकालते रहें। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अच्छी कंपनी और बढ़िया क्वॉलिटी के होने चाहिए।
लापरवाही से बचें, रखें ध्यान
- हर रात गैस सिलेंडर की नॉब को बंद करके ही सोना चाहिए। साथ ही गैस के पाइप को हर 6 महीने में बदलते रहना चाहिए।
- ओवरलोडिंग से बचें। अक्सर हम एक ही इलेक्ट्रॉनिक सॉकेट में टू-पिन या थ्री-पिन वाला प्लग लगा देते हैं। इससे लोड बढ़ जाता है और स्पार्किंग होने लगती है।
- रसोई में चूल्हे पर दूध का पतीला या तेल की कड़ाही चढ़ाकर निश्चिंत होना भी सही नहीं। ऐसा कर हम अक्सर दूसरे कामों में बिजी हो जाते हैं और तेल बेहद गर्म होकर आग पकड़ लेता है या फिर दूध उबल कर चूल्हे पर गिर जाता है। इससे चूल्हे की आग बुझ जाती है और गैस लीक होती रहती है, जो आग पकड़ लेती है।
- खराब रबड़ या खराब सीटी वाला प्रेशर कुकर यूज करना भी खतरनाक है। ऐसा होने पर कुकर ब्लास्ट कर सकता है।
- किचन में खाना बनाते समय ढीले-ढाले और सिंथेटिक कपड़े न पहनें। ये आग जल्दी पकड़ते हैं।
- इनवर्टर में पानी सही रखें। कम पानी होने, इनवर्टर की तार को अच्छी तरह कवर नहीं करने या फिर तार को ढीला छोड़ देने से स्पार्किंग हो सकती है।
- बच्चे के हाथ में माचिस न दें। यह आग लगने की वजह बन सकता है।
- फ्रिज के दरवाजे पर लगी रबड़ को अच्छी तरह साफ करें, वरना दरवाजा सही से बंद नहीं होगा। इससे कम्प्रेसर गर्म होकर आग लगने की वजह बन सकता है।
- कपड़े प्रेस करने के बाद गर्म आयरन को किसी कपड़े, पर्दे या इलेक्ट्रॉनिक प्लग के पास न रखें। गर्म आयरन की गर्मी से ये सभी चीजें आग पकड़ सकती हैं।
- बाथरूम के अंदर स्विच न लगवाएं, वरना नहाते समय या कपड़े धोते समय पानी उस पर गिर सकता है, जिससे स्पार्क हो सकता है। अंदर लगना ही है तो ऊंचाई ज्यादा हो, जहां तक पानी की छीटें न जा सकें।
- हर इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक आइटम को एक दिन में लगातार चलाने की तय सीमा होती है। फिर चाहे वह एसी हो, पंखा हो, टीवी या फिर मिक्सी ही क्यों न हो। हर प्रॉडक्ट की पैकिंग पर यह जानकारी होती है। जरूरत से ज्यादा चलाने पर इलेक्ट्रॉनिक आइटम गर्म हो जाते हैं और आग लगने का कारण बन सकते हैं।
- जब भी घर से बाहर जाएं तो सभी स्विच और इनवर्टर जरूर बंद करें।
करके रखें तैयारी -
 

आग शुरू में हमेशा हल्की होती है। उसे उसी समय रोक देना बेहतर है, लेकिन अक्सर उस वक्त हम घबरा जाते हैं और कोई कदम नहीं उठा पाते। यह भी कह सकते हैं कि हम इसलिए कदम उठा नहीं पाते क्योंकि हमने पहले से तैयारी नहीं की होती है। मसलन घर में फायर एक्सटिंगविशर रखा है, लेकिन हमें उसे चलाना नहीं आता। ऐसे में जरूरी है कि हम आग से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें। एक्सपर्ट मानते हैं कि आग कैसे बुझानी है, एक-दूसरे को कैसे बचाना है, इन सबके लिए सभी को हर दो-तीन महीने में प्रैक्टिस जरूर करनी चाहिए। मेन गेट के अलावा, आग लगने पर और कहां से सुरक्षित निकल सकते हैं, यह भी पहले से सोच कर रखें और इसकी प्रैक्टिस भी करते रहें।
आग लग जाए तो...
- घबराएं नहीं और जिस चीज में आग लगी है, उसके आसपास रखी सभी चीजों को हटाने की कोशिश करें, ताकि आग को फैलने का मौका न मिले।
- अगर शॉर्ट सर्किट से आग लगती है तो मेन सर्किट को बंद कर दें और फायर एक्सटिंगविशर का प्रयोग करें। अगर यह नहीं है तो आग पर मिट्टी या रेत डालें। पानी न डालें। इलेक्ट्रिकल फायर में पानी का इस्तेमाल इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे करंट लग सकता है।
- आग ज्यादा है तो घर के सभी सदस्यों को इकट्ठे कर सुरक्षित जगह पर जाने की कोशिश करें। अगर बिल्डिंग में रहते हैं तो लिफ्ट की जगह सीढ़ियों के जरिए नीचे उतरें।
- आग लग जाने पर धुआं फैलता है इसलिए मुंह को ढककर निकलें।
- खाना बनाते समय अगर कढ़ाई में आग लग जाए तो उसे किसी बड़े बर्तन से ढक देना चाहिए। इससे आग बुझ जाएगी।
- अगर सिलिंडर में आग लग जाती है तो सबसे पहले उसकी नॉब को बंद करने की कोशिश करें। फिर गीला कपड़ा या बोरी डालकर उसे ठंडा करने की कोशिश करें। साथ ही सिलिंडर को खींचकर खुली जगह पर ले जाएं।
...गर कोई जल जाए
- कपड़ों या शरीर में आग लग जाए तो खड़े न रहें और न ही भागें। मुंह को ढककर जमीन पर लेट जाएं और रेंगकर चलें। इससे आग बुझ जाएगी। किसी और शख्स में आग लगी हो तो कंबल या मोटा कपड़ा डालकर आग बुझाएं। आग बुझाने के बाद उस शख्स पर पानी डालें।
- खिड़कियां खोल दें ताकि धुएं से दम न घुटे। धुएं में दम घुटने से अगर कोई बेहोश हो गया है तो सबसे पहले उसे खुली हवा में ले जाएं ताकि ऑक्सिजन मिल सके। आमतौर पर घर में ऑक्सिजन नहीं होती इसलिए मरीज को तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं। मुंह से हवा देने की कोशिश न करें क्योंकि इससे मरीज को कोई फायदा नहीं होगा।
- जख्म पर टूथपेस्ट या किसी तरह का तेल लगाने की गलती न करें। इससे जख्म की स्थिति गंभीर हो सकती है और डॉक्टर को जख्म साफ करने में भी दिक्कत होगी।
- जख्म मामूली है तो उस पर सिल्वर सल्फाडाइजीन (Silver Sulfadiazine) क्रीम लगाएं। यह मार्केट में एलोरेक्स (Alorex), बर्निल (Burnil), बर्नएड (Burn Aid), हील (Heal) आदि ब्रैंड नेम से मिलती है। अगर जख्म ज्यादा हो तो हॉस्पिटल ले जाने तक उस पर नॉर्मल पानी डालते रहें ताकि जख्म गहरा न हो जाए। ये उपकरण हैं कारगर
आग कैसे और कहां लगी है, इसके आधार पर फायर एक्स्टिंगग्विशर को 5 कैटिगरी में बांटा गया है। हर फायर एक्स्टिंगग्विशर पर कैटिगरी लिखी होती है। आग लगने की वजह के मुताबिक उन्हें यूज करें:
Class A: सॉलिड यानी कागज, लकड़ी, कपड़ा, प्लास्टिक आदि से लगने वाली आग
Class B: लिक्विड यानी पेट्रोल, पेंट, स्प्रिट या तेल से लगने वाली आग
Class C: गैस यानी एलपीजी, वेल्डिंग गैस और बिजली के उपकरण से लगने वाली आग
Class D: मेटल यानी मैग्नीशियम, सोडियम या पोटैशियम से लगने वाली आग
Class K: कुकिंग ऑयल से लगने वाली आग
आग के क्लासिफिकेशन के अनुसार ही फायर एक्स्टिंगग्विशर का भी क्लासिफिकेशन किया गया है:
वॉटर एंड फोम : क्लास A की आग के लिए
कार्बनडाईऑक्साइड : क्लास B और C की आग के लिए
ड्राई केमिकल : क्लास A, B और C की आग के लिए
वेट केमिकल : क्लास K की आग के लिए
क्लीन एजेंट : क्लास B और C की आग के लिए
ड्राई पाउडर : क्लास B की आग के लिए
वॉटर मिस्ट : क्लास A और C की आग के लिए
आमतौर पर घर में ड्राई केमिकल वाला फायर एक्स्टिंगग्विशर ही रखा जाता है। इस तरह के एक्स्टिंगग्विशर के सिलिंडर पर ABC लिखा होता है। मार्केट में इसके रेट वेट के हिसाब से हैं।
1 किलो : 740 रुपये
2 किलो : 900 रुपये
4 किलो : 1400 रुपये
6 किलो : 1740 रुपये
आप इन्हें ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। इनमें टॉप ब्रैंड हैं: सीजफायर (Ceasefire), फायरफॉक्स (Firefox), अतासी (Atasi), अग्नि (Agni) आदि। इन कंपनियों के कार के भी फायर एक्स्टिंगग्विशर आते हैं। सिलिंडरों के अलावा मॉड्यूलर एक्स्टिंगग्विशर भी बहुत काम की चीज है। अभी तक यह ऑफिस या इंडस्ट्रियल एरिया में ही लगाया जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल रेजिडेंशल एरिया में भी होने लगा है। इसे घर में कहीं भी लगा सकते हैं, लेकिन किचन में लगाना सबसे बेहतर है।
यह सीलिंग में फिट होता है। इसके अंदर एक छोटा-सा बल्ब लगा होता है, जो 65 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान पहुंचते ही फट जाता है और उसमें से पाउडर निकलने लगता है, जो आग बुझा देता है। छोटा 1800 रुपये में और बड़ा 2400 रुपये में आता है। आपने घर में जो भी फायर एक्स्टिंगग्विशर रखा है, उसे साल में एक बार चेक जरूर करें। उसकी नोब ग्रीन एरिया में होनी चाहिए।
कार में लग जाए आग तो...
कहा जाता है कि जिस कार में सेंट्रल लॉक लगा होता है, आग लगने पर उस कार के दरवाजे नहीं खुलते, लेकिन ऐसा नहीं है। आग लगने पर भी दरवाजे खुल जाते हैं। अगर दरवाजे नहीं खुलें तो अगली सीट के हेड रेस्ट को निकालकर शीशे को तोड़ सकते हैं। कुछ कारों में गियर लॉक लगा होता है। उस गियर लॉक से भी शीशा तोड़ा जा सकता है। साथ ही कार में हमेशा छोटी हथौड़ी, हॉकी स्टिक या फिर रॉड रखनी चाहिए ताकि आग लगने पर शीशा तोड़ा जा सके। इसके अलावा, कार में फायर एक्सटिंगविशर जरूर रखें।

घर बनाते हुए रखें ध्यान

- घर, कोठी, रेजिडेंशल बिल्डिंग आदि बनाते वक्त बिल्डिंग बायलॉज को फॉलो करना चाहिए। लेकिन 15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग बनाते वक्त इसे फॉलो करना अनिवार्य है, वरना फायर डिपार्टमेंट से एनओसी नहीं मिलेगी।
- अमूमन सभी मल्टिस्टोरी बिल्डिंगों में लिफ्ट जरूर होती है। लेकिन इसके साथ ही सीढ़ियां भी जरूर होनी चाहिए ताकि आग लगने पर सीढ़ियों के जरिए आराम से बाहर निकला जा सके। सीढ़ियों की चौड़ाई कम-से-कम 1 मीटर होनी चाहिए।
- रेजिडेंशल बिल्डिंग्स में हर दो फ्लोर छोड़कर एक रेस्क्यू बालकनी होना जरूरी है। यह इसलिए होती है ताकि आग लगने पर सभी यहां जमा हो सकें और फायर ब्रिगेड वाले उन्हें आसानी से निकाल सकें। इन बालकनी को बनाने का फायदा तभी है, जब बिल्डिंग में रहने वाले हर तीसरे-चौथे महीने छोटी-सी मॉक ड्रिल करें। किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए यह जरूरी है।
 

- पानी की एक टंकी बिल्डिंग के ऊपर और एक अंडरग्राउंड होनी चाहिए ताकि आग लगने पर वहां से पानी निकालकर आग बुझाई जा सके।
- 15 से 40 मीटर ऊंची बिल्डिंग के चारों ओर 6 मीटर और 40 मीटर से ऊंची बिल्डिंग के लिए 9 मीटर तक की सड़क होनी चाहिए ताकि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को वहां तक पहुंचने और चारों तरफ घूमने में परेशानी न हो और वे आग को बुझा सकें।
- आपका घर फायर-प्रूफ है या नहीं, इसकी जांच प्राइवेट फायर अडवाइजर से करा सकते हैं। ऑनलाइन सर्च करने पर ये आपको मिल जाएंगे। दिल्ली में रहते हैं तो दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर के नाम लेटर लिख पास के फायर स्टेशन में दे सकते हैं। दिल्ली फायर सर्विस का कर्मचारी घर आएगा और चेक करेगा कि घर फायर-प्रूफ है या नहीं। यह सर्विस फ्री है।
फायर इंश्योरेंस भी जरूरी-
घर का फायर इंश्योरेंस जरूर कराना चाहिए। जानते हैं फायर इंश्योरेंस से जुड़े चंद अहम सवालों के जवाब:
कौन ले सकता है फायर इंश्योरेंस?
जिस किसी ने भी लीगल तरीके से प्रॉपर्टी या घर खरीदा है, वह फायर इंश्योरेंस ले सकता है।
इसकी क्या जरूरत है?
फायर इंश्योरेंस घर में आग लगने और उससे नुकसान होने पर उसे कवर करने का गारंटी देता है। नियमानुसार रेजिडेंशल एरिया के लिए फायर इंश्योरेंस जरूरी नहीं है, लेकिन इसे लेना फायदेमंद रहता है और किसी हादसे की सूरत में हमारी मदद करता है। प्रॉपर्टी की मौजूदा मार्केट वैल्यू के मुताबिक इंश्योरेंस का अमाउंट तय होता है।

किस रेजिडेंशल प्रॉपर्टी के लिए इंश्योरेंस ले सकते हैं?
जो भी प्रॉपर्टी आपने खरीदी है, मसलन अपार्टमेंट, फ्लैट्स, कोठी आदि, उसका इंश्योरेंस करा सकते हैं। यहां तक कि रेंट पर ली गई रेजिडेंशल प्रॉपर्टी का भी फायर इंश्योरेंस करवा सकते हैं। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, फर्नीचर, सभी तरह के गैजेट्स यानी घर में इस्तेमाल होने वाला एक-एक सामान इस इंश्योरेंस में कवर होता है।
फायर इंश्योरेंस में कैसे हादसे कवर होते हैं?
किसी भी तरह की आगजनी, एयरक्राफ्ट क्रैश, प्राकृतिक आपदा (बाढ़, आंधी, भूकंप, लैंडस्लाइड आदि) जैसी स्थिति में घर को होने वाला नुकसान फायर इंश्योरेंस में कवर होता है।
इंश्योरेंस का प्रीमियम और अवधि कितनी होती है?
इंश्योरेंस कंपनियां प्रॉपर्टी की कीमत और इंश्योरेंस की कीमत के आधार पर प्रीमियम ऑफर करती हैं, जोकि आमतौर पर कम ही होता है। आप एड-ऑन कवर भी ले सकते हैं जिसमें आर्किटेक्चर की फीस आदि कवर हो जाती है। इसके लिए एक्स्ट्रा प्रीमियम देना पड़ सकता है। इंश्योरेंस की अवधि अमूमन एक साल की होती है, लेकिन कुछ केस में यह 10 साल तक भी हो सकती है।
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