20.7.17

ग्रहो के प्रभाव के उपाय व ज्योतिष विज्ञानं




 ग्रहो के अशुभ प्रभाव के  उपाय व ज्योतिष विज्ञानं -
सूर्य गृह से सम्बंधित :
रोग :
सिरदर्द , ज्वर , नैत्रविकार , मधुमेय , पित्त रोग , हैजा , हिचकी आदि |
रत्न उपरत्न :
माणिक्य , लालड़ी , तामडा , महसूरी |
जड़ी बूटिया :
बेलपत्र की जड़
दान :
गेंहू , लाल और पीले मिले हुए रंग के वस्त्र , लाल फल लाल मिठाई , सोने के कण , गाय, गुड और तांबा।
चन्द्रमा से सम्बंधित :
रोग :
तिल्ली , पांडू , यकृत , कफ , उदार सम्बन्धी विकार , मनोविकार
रत्न उपरत्न :
मोती , निमरू , चंद्रमणि , सफ़ेद पुखराज , ओपल
जड़ी बूटिया :
खिन्नी की जड़
दान :
चावल , श्वेत वस्त्र , कपूर , चांदी , शुद्ध , सफ़ेद चन्दन , वंश फल , श्वेत पुष्प , चीनी , वृषभ , दधि , मोती आदि।
मंगल से सम्बंधित :
रोग : पित्त , वायु , कर्ण रोग , गुणगा , विशुचिका , खुजली , रक्त सम्बन्धी बीमारिया , प्रदर , राज , अंडकोष रोग , 
बवासीर आदि।
रत्न – उपरत्न : 
मूंगा , विद्रुम
जड़ी बूटिया :
 अनंत मूल की जड़
दान :
 लाल मक्का , लाल मसूर , लाल वस्त्र , लाल फल , लाल पुष्प।

बुध से सम्बंधित :

रोग : खांसी , ह्रदय रोग , वातरोग , कोढ़ , मन्दाग्नि , श्वास रोग , दम , गूंगापन
रत्न उपरत्न : 
पन्ना , संग पन्ना , मरगज तथा ओनिक्स
जड़ी बूटिया : 
विधारा की जड़
दान : 
हरी मुंग , हरे वस्त्र , हरे फल , हरी मिठाई , कांसा पीतल , हाथी दांत , स्वर्ण कपूर , शस्त्र , षटरस भोजन , घृत आदि।

वृहस्पति से सम्बंधित :

रोग : कुष्ठ रोग , फोड़ा , गुल्म रोग , प्लीहा , गुप्त स्थानों के रोग
जड़ी बूटिया :
 नारंगी या केले की जड़
दान : 
चने की दल , पीले वस्त्र , सोना , हल्दी , घी , पीले वस्त्र , अश्व , पुस्तक , मधु , लवण , शर्करा , भूमि छत्र आदि।

शुक्र से सम्बंधित :

रोग : प्रमेह , मंद बुद्धि , वीर्य विकार , नपुंसकता , वीर्य का इन्द्रिय सम्बन्धी रोग
 
रत्न उपरत्न : 
हिरा, करगी , सिग्मा
जड़ी बूटिया : 
सरपोखा की जड़
दान : 
चावल , चांदी , घी , सफ़ेद वस्त्र , चन्दन , दही , गंध द्रव्य , चीनी , गाय , जरकन , सफ़ेद पुष्प आदि।

शनि से सम्बंधित :

रोग : 
उन्माद , वाट रोग , भगंदर , गठिया , स्नायु रोग , टीबी , केंसर , अल्सर
रत्न उपरत्न : नीलम , नीलिमा , जमुनिया , नीला कटहल
जड़ी बूटिया : 
बिच्छु बूटी की जड़ या शमी की जड़
दान : 
काले चने , काले कपडे , जामुन फल , कला उड़द , काली गाय , गोमेद , कालेजूते , तिल , उड़द , भैस , लोहा , तेल , उड़द , कुलथी , काले पुष्प , कस्तूरी सुवर्ण।
राहू से सम्बंधित :
रोग : अनिंद्रा , उदर रोग , मस्तिष्क रोग, पागलपन
जड़ी बूटिया :
 सफ़ेद चन्दन
रत्न उपरत्न : गोमेद , तुरसा , साफा
दान :
 
अभ्रक , लौह , तिल , नीला वस्त्र , छाग , ताम्रपत्र , सप्त धान्य , उड़द , कम्बल , जोऊ , तलवार।
केतु से सम्बंधित :
रोग : चर्म रोग , मस्तिष्क तथा उदर सम्बन्धी रोग , जटिल रोग , अतिसार , दुर्घटना , शल्य क्रिया आदि
रत्न उपरत्न : 
वैदूर्य , लहसुनिया , गोदंती संगी
जड़ी बूटिया
असगंध की जड़
दान : 
कस्तूरी तिल , छाग , कला वस्त्र , ध्वज , सप्त धान्य , उड़द , कम्बल।
रोग की हालत में ग्रह का प्रकोप अर्थात ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा लगी हुई समझनी चाहिए |
उच्च राशि का है तो उसे मजबूत किया जाता है।मंत्र जाप, रत्न ,एवं जड़ी बूटिया धारण करनी चाहिए |*इससे रोग हल्का होगा और ठीक होने लगेगा | रत्न उपरत्न सम्बंधित ग्रह के वार व नक्षत्र में धारण करने चाहिए |
यदि कोई ग्रह नीच का है तो उसका दान संकल्प करके ब्रह्मण या जरूरतमंद को श्रद्धापूर्वक देना चाहिए
सूर्य गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ.
......पिता से मनमुटाव, सरकारी कार्यो मे परेशानी / सरकारी नौकरी मे परेशानी, सिरदर्द, नेत्र रोग, ह्रदयरोग, चर्मरोग, अस्थि रोग, रक्तचाप आदि।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे, सुबह-सवेरे सूर्य भगवान को जल चढ़ाएँ, लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल, माणिक रत्न धारण करे ।
चन्द्रमा गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ......
माता से सम्बन्धो में मनमुटाव, मानसिक परेशानियाँ, नींद का ना आना, कफ, सर्दी, जुकाम आदि रोग मासिक धर्म संबंधी रोग, पित्ताशय में पथरी,निमोनिया, रक्त विकार आदि।
माता का सम्मान करे, चांदी, चावल और दूध का दान करे, पूर्णिमा में चन्द्र को अर्क दे व चांदनी रात मे घूमे, मोती रत्न धारण करे।
मंगल गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
क्रोध की अधिकता, भाइयो से संबंध में मनमुटाव, समय - समय पर छोटी मोटी दुर्घटनाये, रक्त विकार, फोड़ा फुंसी, बवासीर, चेचक आदि रोगो का प्रकोप।
भाई का सम्मान करे, हनुमान चालीसा पढ़े, लाल मसूर की दाल बहते पानी में बहाये, मूंगा रत्न धारण करे।
बुध गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
विद्या / बुद्धि सम्बन्धी परेशानी, गले के रोग, नाक के रोग, उन्माद की स्थिति, मती भ्रम, व्यवसाय में हानि, विचारो में द्वन्द / अस्थिरता ।
बेटी,बुआ, मौसी,बहन का सम्मान करे, सुराख़ वाला तांबे का पैसा बहते पानी में बहाये,
माँ दुर्गा/गणेश जी की आराधना करे, पन्ना रत्न धारण करे ।
गुरु गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
 
पूजा पाठ में मन न लगना, आय में कमी होने लगना, संचित धन का व्यय होना, विवाह में देरी, संतान में देरी, पेट के रोग, कान के रोग, गठिया, कब्ज, अनिद्रा आदि से पीड़ित होना।
दादा का सम्मान करे, गरीब व जरुरत मंद बच्चो को पुस्तको का दान करे, गुरु का आशीर्वाद ले,
चने की दाल धरम स्थान मे दे, पुखराज रत्न धारण करे।
शुक्र गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
जीवन की सुखसुविधा मे कमी, वाहन/मकान कष्ट, पत्नी से मनमुटाव, नपुंसकता, धातु एवं मूत्र संबंधी रोग, गर्भाशय रोग, मधुमय आदि से पीड़ित होना।
उपाय
पत्नी/स्त्रियों का सम्मान करे, देशी घी, मिस्री मंदिर मे दे, लक्ष्मी माता की उपासना करे, वाइट ओपल या हीरा रत्न धारण करे।
शनि गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
फैक्ट्री या व्यवसाय में नौकरो से कलेश, नौकरी में परेशानी, वायु विकार, पैरो की तकलीफ, भूत प्रेत का भय, रीड की हड्डी में दिक्कत आदि ।
नौकरो को गाली न दे व उनके पैसे न मारे, शनि देव की उपासना करे, काली उड़द, लोहा, तेल, तिल आदि का दान करे, नीलम रत्न धारण करे।
राहु गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, भूत प्रेत, जोड़ो मे दर्द, बिना वजह मन मे भय, अहंकार हो जाना आदि ।
भैरो बाबा के दर्शन करे, दुर्गा माता का पूजन करे, गोमेद रत्न धारण करे ।
केतु गृह पीड़ित होने पर परेशानियाँ
जादू टोने से परेशानी, छूत की बीमारी, रक्त विकार, चेचक, हैजा व फोड़े फुंसी, स्किन इन्फेक्शन, एक्सीडेंट अधिक होने आदि ।
उपाय
लंगड़ा व्यक्ति को भोजन खिलाये, कोडियों को खिचड़ी दान करे, लहसुनिया रत्न धारण करे ।
सूर्य के उपाय 
सूर्य को मजबूत करने का सबसे अच्छा दिन रविवार ...
रविवार को गुड़ के छोटे या बड़े टुकड़ा खा कर आप अपने सूर्य, मंगल,
और चंद्रमा को कुछ हद तक बेहतर बना सकते हैं ...
रविवार को पान खाने से
सूर्य मजबूत होता है ...
रविवार को एक गिलास अनार का रस पीने से आपकी कुंडली में सूर्य की शुभ शक्तियों में वृद्धि होगी ...
रविवार को भोजन में नमक से बचना भी चाहिए ...
ताम्बे की प्लेट में खाया खाएं ...
गाय को गुड़ खिलाये ...
सोना, पीतल , गेहूं, लाल कपड़े , गुड़ दान करें ...
लाल कपड़े में बंधे बेलपत्र की जड़ पहनने से सूर्य की परेशानियों मे राहत होगी 
विवाह वर्जित कुंडली में मंगली कोई भी हो न करे या ये पड़े 
यदि आपकी कुंडली में सप्तमेश लग्न से असाधारण रूप से बलवान है तो आपमें और आपके जीवनसाथी में काफी अंतर होगा |
यदि पुरुष की कुंडली में शुक्र नीच का हो और सप्तमेश शुक्र का शत्रु हो जैसे कि सूर्य, मंगल या चन्द्र तो विवाह अनमेल होगा | ऐसे योग में आपकी पत्नी में और आपमें बहुत अधिक अंतर होगा |
यदि किसी भी प्रकार से मंगल की दृष्टि शुक्र और सप्तम स्थान दोनों पर पड़ती हो तो विवाह अनमेल होगा | पति या पत्नी में से कोई एक अपंग होगा |
शुक्र या गुरु को मंगल और शनि देख रहे हों और सप्तम स्थान पर कोई शुभ ग्रह न हो तो विवाह अनमेल होगा | इस योग में विवाह के बाद दोनों में से कोई एक मोटापे की और अग्रसर हो जाता है
गुरु लग्न में वृषभ, मिथुन, कन्या राशी में हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो व्यक्ति का शरीर विवाह के बाद बहुत बेडोल हो जाता है इसके विपरीत यदि शुक्र स्वराशी में या अच्छी स्थिति में हो तो पति पत्नी में जमीन आसमान का फर्क नज़र आता है |
शनि लग्न में हो और गुरु सप्तम में हो तो पति पत्नी की उम्र में काफी अंतर होता है |
राहू केतु लग्न और सप्तम में हों और लग्न या सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि हो तो देखने में पति पत्नी की सुन्दरता में भारी अंतर होता है यानि एक बेहद खूबसूरत और दूसरा इसके विपरीत |
 
ग्रह से कैसे विचार करे जीव के जीवन का ज्योतिष ज्ञान 
सूर्यपिता, आत्मा, प्रताप, आरोग्यता, आसक्ति और लक्ष्मी का विचार करें।
चन्द्रमा मन, बुद्धि, राजा की प्रसन्नता, माता और धन का विचार करें।
मंगल पराक्रम, रोग, गुण, भाई, भूमि, शत्रु और जाति का विचार करें।
बुध विद्या, बन्धु, विवेक, मामा, मित्र और वचन का विचार करें।
गुरु बुद्धि, शरीर पुष्टि, पुत्र और ज्ञान का विचार करें।
शुक्र स्त्री, वाहन, भूषण, काम, व्यापार तथा सुख का विचार करें।
शनि आयु, जीवन, मृत्युकारण, विपत्ति और सम्पत्ति का विचार करें।
राहु पितामह (पिता का पिता) तथा रोग का विचार करें।
केतु मातामह (नाना) का तथा रोग का विचार करें।
ग्रहो के स्थान और उनकी गणना 
1.बृहस्पति :-बाप ,दादा ,बुजुर्ग ,धर्म स्थान का पंडित या पाठी बुजुर्ग,ससुर
2.सूर्य :- अनुशासन ,समय का पाबंद ,खुद अपना आप ,सरकार
3.चंद्र :- माता ,दादी ,बुजुर्ग औरत ,सास .
4.मंगल :- भाई ,पडोसी , खून के संबंधी ,ताया,बहनोई,साला,भाभी
5.शुक्र :- मरद के लिए उसकी औरत और औरत के लिए उसका मरद,बहु
6.बुध :- बहन ,बेटी,भुआ ,मासी ,फूफी,साली
7.शनि :- चाचा ,मजदूर इंसान
8.केतू :- पुत्र , भांजा ,भतीजा,मामा
9.राहु :- ससुराल
अपनी आर्थिक-स्थिति को
सुधारने हेतु एवम्
धनवान बनने हेतु
करिये
कृष्ण-पक्ष के तेरस को या
कृष्ण-पक्ष की अमावस्या
प्रदोष काल मेंश्री कुबेर साधना
घी का दीपक जलाए जो
रात भर जलता रहे
एक चौकी पर नया वस्त्र बिछा कर
कुबेरजी की विग्रह रखकर
पुष्पों की माला पहना कर
अब दाएं हाथ में जल लेकर
बोलिए
अस्य कुबेर मन्त्रस्य
विश्रवा ऋषि: , वृहती छंदः
शिवमित्र धनेश्वरो देवता
ममाभीष्टसिद्घयर्थे जपे विनियोग:|
हाथ का जल कुबेर जी के
विग्रह के पास छोड़ दे
अब हाथ में पुष्प अक्षत द्रव्य
को हाथ में लेकर
ध्यान करे
मनुजबाह्य विमान वरस्थितं
गरुडरत्ननिभं निधिनायकम |
शिवसखं मुकुटादि विभूषितं
वरगदे दधतं भज तुन्दिलम ||
इस तरह से निर्धारित कर ले
कि धनतेरस या दीपावली तक
पूरा हो सके
रुद्राक्ष की माला से करे
कुबेर-मन्त्र
ॐ यक्षाय कुबेराय
वैश्रवणाय धनधान्य समृद्घि
में देहि दापय स्वाहा ||
इसके स्थान पर
भी कर सकते है
षोडशाक्षर कुबेर मन्त्र
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं
श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं
वित्तेश्वराय नमः ||
(1) यदि व्यक्ति चिड़चिढ़ा हो रहा है तथा बात-बात पर गुस्सा हो रहा है तो उसके ऊपर से राई-मिर्ची उसार कर जला दें। तथा पीडि़त व्यक्ति को उसे देखते रहने के लिए कहें
(2) सुबह कुल्ला किए बिना पानी, दूध अथवा चाय न पिएं। साथ ही उठते ही सबसे पहले सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करें। इससे स्वास्थ्य तो सही रहेगा ही, भाग्य भी चमक उठेगा।
(3) यदि किसी के साथ बार-बार दुर्घटना होती हैं तो शुक्ल पक्ष (अमावस्या के तुरंत बाद का पहला) के प्रथम मंगलवार को 400 ग्राम दूध से चावल धोकर बहती नदी अथवा झरने में प्रवाहित करें। यह उपाय लगातार सात मंगलवार करें, दुर्घटना होना बंद हो जाएगा।
(4) यदि कोई पुराना रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र को लेकर एक चांदी की तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दें। रोग जल्दी ही पीछा छोड़ देगा।
(5) कोई असाध्य रोग हो जाए तथा दवाईयां काम करना बंद कर दें तो पीडि़त व्यक्ति के सिरहाने रात को एक तांबे का सिक्का रख दें तथा सुबह इस सिक्के को किसी श्मशान में फेंक दें। दवाईयां असर दिखाना शुरू कर देंगी और रोग जल्दी ही दूर हो जाएगा
एक टिप्पणी भेजें