23.7.17

विवाहित महिला सिंदूर क्यूँ लगाती हैं ?


     हिन्दू धर्म में सिंदूर का बहुत खास महत्व है। यह एक महिला के लिए उसके सुहाग की निशानी होती है। हम जब  भी कभी किसी शादीशुदा औरत को देखते हैं तो उसके माथे पर सिंदूर जरूर लगा दिखता है। एक शादीशुदा औरत को सिंदूर के बिना अधूरा माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में सिंदूर का आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सिंदूर लगाने के पीछे के कारणों को जानने का प्रयास किया है। इस सिंदूर को ना केवल शादी के प्रतीक के रूप में लगाया जाता है बल्कि इसे लगाने के पीछे और भी कई कारण हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं।
* परंपरागत रूप से यह पति की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए लगाया जाता है
हिंदू समाज में जब भी किसी लड़की की शादी होती हैं तो उसके लिए सिंदूर लगाना बहुत जरूरी होता है। माना जाता है कि शादीशुदा महिला का सिंदूर लगाना उसके पति की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक होता है। यही वजह है कि विधवा औरतें अपनी मांग में सिंदूर नहीं लगती हैं।
* लाल रंग शक्ति का प्रतीक माना जाता है
भारतीय पौराणिक कथाओं में लाल रंग के माध्यम से सती और पार्वती की ऊर्जा को व्यक्त किया गया है। सती को हिन्दू समाज में एक आदर्श पत्नी के रूप में माना जाता है। जो अपने पति के खातिर अपने जीवन का त्याग सकती है। हिंदुओं का मानना है कि सिंदूर लगाने से देवी पार्वती ‘अखंड सौभागयवती’ होने का आशीर्वाद देती हैं।< *सिंदूर देवी लक्ष्मी के लिए सम्मान का प्रतीक माना जाता है
*यह कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर पांच स्थानों पर रहती हैं और उन्हें हिन्दू समाज में सिर पर स्थान दिया गया है। जिसके कराण हम माथे पर कुमकुम लगा कर उन्हें समान देते हैं। देवी लक्ष्मी हमारे परिवार के लिए अच्छा भाग्य और धन लाने में मदद करती हैं।
*सिंदूर औरत को शांत और स्वस्थ रखने में मदद करता है
*वैज्ञानिक दृष्टि से अगर देखें तो एक औरत जब सिंदूर लगाती है तो वह सिंदूर उसके मन को शांत रखने में मदद करता है। इतना ही नहीं सिंदूर से उसका स्वास्थ भी अच्छा बना रहता है।
*सिंदूर रक्तचाप को नियंत्रित करता है और सेक्स की इच्छा को भी बढ़ाता है
सिंदूर के माध्यम से रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही यह महिलाओं में सेक्स की इच्छा को बढ़ाने में भी मदद करता है। सिंदूर के माध्यम से महिलाओं की पिट्यूटरी ग्रंथियां स्थिर रहती हैं।
यह उत्तरी भारत में एक सांस्कृतिक प्रथा है
*आप इस बात को तो जानते ही होंगे की सिन्दूर केवल उत्तरी भारत में ही लगाया जाता है। उत्तर भारत में हिन्दू धर्म को मानने वाली हर महिला शादी के बाद सिंदूर जरूर लगाती है। जबकि दक्षिण भारत में सिंदूर लगाने की प्रथा नही है।
*यह महत्वपूर्ण होता है कि पति अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाए
*हिन्दू धर्म में नवरात्र और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान पति के द्वारा अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह उनके एक साथ रहने का प्रतीक होता है और इससे वो काफी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं।
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