20.7.17

ब्रह्मांड में हैं अनगिनत आकाश गंगाएं //The billions of galaxies in the universe



मिल्की वे, एंड्रोमेडा, ओमेगा सेंचुरी, सेंटोरस.. ये सब आकाशगंगाओं के नाम हैं। और जब हमारी धरती की जनसंख्या से भी अधिक आकाशगंगाओं की संख्या हो तो नाम तो देना ही पड़ेगा। अंतरिक्ष में दूर-दूर तक फैली हैं ये। तो आओ, आज सत्य सिंधु से जानते हैं इन आकाशगंगाओं के बारे में
ब्रह्मांड में हैं अरबों आकाशगंगाएं। बात सुनकर ताज्जुब तो होता है, लेकिन विज्ञान अपने शोध के आधार पर तो यही कहता है। दिलचस्प बात तो यह भी है कि इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। अब तुम इस बात का अंदाजा तो लगा ही सकते हो कि यह ब्रह्मांड कितना विशाल है। तभी तो इसकी सीमा का कोई अंदाजा नहीं लगा पाया है। आखिर अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे की एक छोर से दूसरे छोर की दूरी ही एक लाख प्रकाश वर्ष है। यानी प्रकाश की किरण को मिल्की वे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में एक लाख वर्ष का समय लगेगा।
अच्छा तो तुम्हें शायद प्रकाश की गति याद आ गई कि इसकी किरणें एक सेकेंड में तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लेती हैं। अब तुम सोच रहे होगे कि अकाशगंगा के बारे में कैसे पता चला। दरअसल, एडविन पॉवेल हब्बल द्वारा बनाई गई दूरबीन की सहायता से ही हम ब्रह्मांड की इन आकाशगंगाओं के बारे में इतनी जानकारियां जुटा पाए हैं।
 
सबसे बड़ी और सबसे छोटी आकाशगंगाएं
आईसी 1101 आकाशगंगा ब्रह्मांड की सबसे बड़ी आकाशगंगा है। यह हमारी आकाशगंगा से 60 गुणा बड़ी है और हमारी आकाशगंगा से इसकी दूरी एक लाख बिलियन प्रकाश वर्ष है। तुम्हें तो मालूम ही होगा कि एक बिलियन प्रकाश वर्ष का अर्थ है एक अरब प्रकाश वर्ष। यानी हमारी आकाशगंगा से आईसी 1101 की दूरी एक लाख अरब प्रकाश वर्ष है। इसी तरह सबसे छोटी आकाशगंगा हमारी आकाशगंगा के करीब ही है। इसका नाम है विलिमन 1। वर्ष 2004 में खोजी गई यह आकाशगंगा हमारी आकाशगंगा से 1 लाख 20 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। इसकी खोज जर्मनी में स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीटय़ूट के निकोलस मार्टिन की टीम ने की थी।
सबसे नजदीकी आकाशगंगा
सबसे नजदीकी आकाशगंगा के बारे में भी जानने की तुम्हारी इच्छा होगी। तो हम बताते हैं तुम्हें कि सबसे नजदीकी आकाशगंगा कौन है। वैसे कुछ लोग एंड्रोमेडा को नजदीकी आकाशगंगा मानते हैं, लेकिन नवीनतम शोध में पाया गया है कि केनिस मेजर ड्वार्फ आकाशगंगा हमारी आकाशगंगा के सबसे करीब है। यह वैसे तो हमारी आकाशगंगा के केन्द्र से 42 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है, लेकिन हमारे सौरमंडल से इसकी दूरी सिर्फ 25 हजार प्रकाश वर्ष ही है, जबकि हमारी आकाशगंगा का केन्द्र 30 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।
ऐसे जन्म लेती हैं आकाशगंगाएं
1950 के दशक में सामने आए सिद्धांत को महाविस्फोट का सिद्धांत यानी द बिग बैंग थियोरी कहा गया। इस सिद्धांत के तहत माना गया कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक महाविस्फोट से हुई है। यह सिद्धांत आकाशगंगाओं के प्रकाश में पाए जाने वाला डाप्लर प्रभाव पर आधारित था।
लेकिन कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि आकाशगंगा की उत्पत्ति का कारण केवल यही सिद्धांत नहीं है। हालांकि महाविस्फोट की घटना के बीते 78.7 करोड़ साल माने जाते हैं।
टकराती भी हैं आकाशगंगाएं
वैसे तो आकाशगंगाएं एक-दूसरे से हजारों-लाखों प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं, फिर भी वे कई बार टकरा जाती हैं। तुमने ऊपर जाना कि केनिस मेजर ड्वार्फ आकाशगंगा हमसे सिर्फ 25 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने पता लगाया कि टकराव की वजह से कई बार उन आकाशगंगाओं में सितारों का निर्माण रुक जाता है। अमेरिकी प्रोफेसर जैफ्री केनी व उनकी टीम ने बताया कि एम 86 व एनजीसी 4438 आकाशगंगाओं के बीच हुई टक्कर ने उनमें तारों के निर्माण को रोक दिया। अंदाजा लगाया कि इन दोनों आकाशगंगाओं के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई होगी। ये आकाशगंगाएं धरती से लगभग 5 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित हैं।

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