26.7.17

ज्योतिष विज्ञान है या कल्पना// Astrology is science or imagination



लोग कहते हैं कि ज्‍योतिष एक कल्पना है, एक झूंठ है| लेकिन उन्हें शायद पता ही नहीं है कि ज्योतिष कल्पना नहीं पूर्ण विज्ञान है, झूठ भी नहीं है पूर्ण सत्य है| ज्योतिष पूरी तरह गणित पर आधारित है, और गणित कभी झूँठा नही हो सकता| झूठे तो ज्‍योतिषी होते हैं| 10 प्रतिशत जानते हैं और 20 प्रतिशत बोलते हैं तो 10 प्रतिशत असत्य तो होना ही है| इसी को लोग कहते हैं कि ज्योतिष झूंठ है| आइऐ आपको दिखाते हैं कि कैसे? कुछ ज्योतिषी कहते हैं कि आप पर शनि की दशा चल रही है और अब आपका अनिष्ठ होना शुरू हो गया है| आप कुछ उपचार कर लें तो आपका यह संकट टल जाएगा| और इसके बाद कुछ उपाय बता देते हैं| आदमी बेचारा जैसे तैसे जोड़ तोड़ कर उस उपाय को करता है, लेकिन अच्छा कुछ भी नहीं होता उल्टे उसकी जेब ज़रूर ढीली हो जाती है| और किसी किसी के साथ कुछ अच्छा हो जाता है तो वह सोंच लेता है कि उस पर से शनि दोष समाप्त हो गया है, और फिर वह उस पंडित या उस ज्योतिषी को दान धन इत्यादि भेंट कर देता है| जबकि सच तो यह है कि पहले पर से शनि की दशा नहीं हटी लेकिन दूसरे पर से हट गई| और यह किसी जप तप या उपाय से नहीं हुआ बल्कि विज्ञान के सर्वमान्य सिद्धांत के कारण हुआ| विज्ञान और ज्योतिष के सर्वमान्य सिद्धांत के अनुसार कोई भी ग्रह हमेशा किसी के ऊपर नहीं रहता बल्कि अपनी चाल के अनुसार अलग अलग राशियों में जाता रहता है| जब एक निश्चित समयानुसार ग्रहों की स्थिति बदलती रहती है तो उपाय करना कहाँ तक उचित है| सच तो यह है कि आकाश में मौजूद 9 ग्रह अपनी अपनी गति से चलते है और गणित के अनुसार एक खास समय पर अलग अलग राशियों में प्रवेश करते हैं| एक खास समय तक उस राशि में रहते हैं और फिर अगली राशि में चले जाते हैं| अलग अलग राशि में उनके अलग अलग प्रभाव होते हैं| कैसे आइए जानते हैं : आचार्य लोंगों ने आकाश को समझने के लिए इसे 12 भागों में बाँट दिया| हर भाग को एक नाम दे दिया जिसे हम राशियों के नाम से जानते हैं| इस प्रकार हम आकाश के 12 भागों को 12 राशियों के नाम से जानते हैं| पूरा सौर मंडल इन्हीं 12 राशियों के अंदर आता है| सूर्य इन्हीं 12 भागों से होकर गुज़रता है| और जब कोई भी ग्रह किसी भी राशि में आता है तो उस पर सूर्य और अन्य ग्रहों की प्रकाश किरणें पड़ने लगती हैं| और ये प्रकाश किरणें प्रकाश के प्रत्यावर्तन सिद्धांतों के अनुसार विभिन्न कोणों से विभिन्न ग्रहों से टकराकर धरती मंडल में प्रवेश करती हैं और उस समय ये प्रकाश किरणें जिस राशि में से होकर धरती मंडल पर आती हैं उस राशि में जन्म पाने वाले लोगों के शरीर में मौजूद लाल रक्त कण उस राशि में प्रवेश कर रहीं राशिष्ठ किरणों को अपने में अवशोषित कर लेती है| और वह प्राणी उस ग्रह के कास्मिक किरणों के प्रभाव में आ जाता है| हर आदमी के शरीर में 12 तरह की किरणें होती हैं| अब अगर किसी के शरीर में 10 पॉइंट किसी खास ग्रह की ज़रूरत है और उसमें 8 पॉइंट ही हैं तो उसे 2 पॉइंट और चाहिए| अब अगर वह 4 पॉइंटस और ले लेगा तो 2 पायंट्स जो ज़्यादा हो जाएगा वह उसे नुकसान ही पहुँचाएगा न कि फायदा| इसी को लोग कहते हैं कि ग्रह दशा खराब हो गई है| अब हमें उपाय करने चाहिए जिससे कि ये 2 पायंट्स समाप्त हो जाएँ| कितने पायंट्स किरणों की ज़रूरत किसे है उसमें कितने पायंट्स उसमें हैं उसे और कितने पायंट्स और चाहिए इसकी जाँच ज्योतिष् और विज्ञान दोनों में है| अतः इसकी जाँच करके ही कोई उपाय करना चाहिए| उपाय भी ज्योतिषियों के नहीं बल्कि ज्योतिष् के करने चाहिए|
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