26.7.17

नागपंचमी पर ख़ास जानकारी //Important information on Nagpanchami


    नाग पंचमी एक हिन्दू पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण श्रद्धा से मनाया जाता है। इस वर्ष 2017 में नाग पंचमी 27 जुलाई गुरुवार के दिन मनाई जाएगी।
   भारतीय संस्कृति में शिव के गले में सर्प और विष्णु को शेषनाग पर शयन करते हुए दिखाया गया है, जो प्रतीकात्मक रुप से सर्प और नाग के महत्व को उजागर करता है. अमृत सहित नवरत्नों की प्राप्ति के लिए
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं ‘मैं नागों में अनंत (शेषनाग) हूं’. पुराणों में वर्णित है कि धरती शेषनाग के फणों के ऊपर टिकी हुई है.
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार इस दिन नाग जाति की उत्पत्ति हुई थी. महाभारत की एक कथा के अनुसार जब महाराजा परीक्षित को उनका पुत्र जनमेजय तक्षक नाग के काटने से नहीं बचा सका तो जनमेजय ने विशाल सर्पयज्ञ कर यज्ञाग्नि में भस्म होने के लिए तक्षक को आने पर विवश कर दिया.तब आस्तिक मुनि के आग्रह और तक्षक के क्षमा मांगने उसे क्षमा कर दिया. उन्होंने वचन दिया कि श्रावण मास की पंचमी को जो व्यक्ति सर्प और नाग की पूजा करेगा, उसे सर्प व नाग दोष से मुक्ति मिलेगी.
    सावन के पावन महीने में भगवान शिव की पूजा करना अत्याधिक लाभप्रद होता है। ये बात तो आप सब जानते हैं। लेकिन शिव जी की पूजा से जुड़ी एक विशेष बात यह भी है कि सावन के इसी महीने में नाग पंचमी का भी त्योहार आता है। भगवान शिव में के गले की शोभा बढ़ाते नाग देवता की पूजा का सावन के महीने में बहुत महत्व है। हिंदू धर्म के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन नागों की पूजा करने से सारी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं।
     
नाग देवता की पूजा अगर विशेष ढंग से तथा विधिपूर्वक की जाए तो यह ओर भी फलदायक होती है।
नाग पंचमी पर नाग पूजन के मंत्र :- 
* ॐ भुजंगेशाय विद्महे, 
सर्पराजाय धीमहि, 

तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।   

दूसरा मंत्र :- 

'सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।। 
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:। 

ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।'   
 नाग पंचमी के दिन अपने दरवाजे के दोनों ओर गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए और धूप, पुष्प आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए। इसके बाद इन्द्राणी देवी की पूजा करनी चाहिए। दही, दूध, अक्षत, जलम पुष्प, नेवैद्य आदि से उनकी आराधना करनी चाहिए। इसके बाद भक्तिभाव से ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए।
   इस दिन पहले मीठा भोजन फिर अपनी रुचि अनुसार भोजन करना चाहिए। इस दिन द्रव्य दान करने वाले पुरुष पर कुबेर जी की दयादृष्टि बनती है। हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उसे बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत के फल से जातक के कुल में कभी भी सांप का भय नहीं होगा
 
वर्तमान में कितना प्रासंगिक है नागपंचमी पर्व
हिन्दू संस्कृति केवल प्राणिमात्र नहीं बल्कि जड़-चेतन, चल-अचल को ईश्वर के रुप में देखता है. प्राचीन काल से पर्वों और उत्सवों को धर्म से जोड़ा गया है. यह यदि प्रत्यक्ष रुप से धार्मिक आस्था में वृद्धि करता है, तो अप्रत्यक्ष रुप से व्यक्ति और समाज को पर्यावरण से जोड़ता है.
    यह संदर्भ सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि मनाए जाने वाले नागपंचमी के लिए और भी ज्यादा प्रासंगिक है. क्योंकि देखा जाए तो वर्तमान समय में सर्पों और नागों को बचाना ज्यादा तर्कसंगत है. कई व्याधियों और रोगों के लिए आज मेडिकल साइंस बहुत हद तक दवाईयों के निर्माण के लिये सांपों और नागों से प्राप्त होने वाले विष पर निर्भर है. इनके जहर की थोड़ी-सी मात्रा अनेक लोगों का जीवन बचानें में उपयोगी है.
भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है. परंपरागत रुप से यहां वर्षा ऋतु में धान की फसल तैयार की जाती है. इन धान के पौधों को चूहे काट कर नष्ट कर देते है. ये चूहे किसान के शत्रु हैं और चूहों के शत्रु हैं सर्प. सर्प और नाग चूहों भक्षण कर एक संतुलन उत्पन्न करते हैं. सर्पों और नागों की इस पारिस्थितिकीय उपयोगिता के कारण ही प्राचीन काल से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है.

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