30.11.16

भगवान कृष्ण से जुड़ी 11 रोचक बातें




भगवान कृष्ण से जुड़ी 11 रोचक बातें
'हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। माया द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, ऐसे आसुर-स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूढ़ लोग मुझको नहीं भजते।'- गीता
कृष्ण को हिंदू धर्म में पूर्णावतार माना गया है। कृष्ण को ईश्वर मानना अनुचित है, किंतु इस धरती पर उनसे बड़ा ईश्वरतुल्य कोई नहीं है इसीलिए उन्हें पूर्ण अवतार कहा गया है। कृष्ण ही गुरु और सखा हैं। कृष्ण ही भगवान हैं। कृष्ण हैं राजनीति, धर्म, दर्शन और योग का पूर्ण वक्तव्य।
कृष्ण को जानना और उन्हीं की भक्ति करना ही हिंदुत्व का भक्ति मार्ग है। अन्य की भक्ति सिर्फ भ्रम, भटकाव और निर्णयहीनता के मार्ग पर ले जाती है। भजगोविंदम मूढ़मते।
कृष्ण ने कब देह छोड़ दी थी, जानिए ऐतिहासिक प्रमाण..
.आर्यभट्‍ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ई.पू. में हुआ। नवीनतम शोधानुसार यह युद्ध 3067 ई. पूर्व हुआ था। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी तभी से कलियुग का आरंभ माना जाता है।
भज गोविंदम मूढ़मते
कृष्ण जन्म और मृत्यु के समय ग्रह-नक्षत्रों की जो स्थिति थी उस आधार पर ज्योतिषियों अनुसार कृष्ण की आयु 119-33 वर्ष आंकी गई है। उनकी मृत्यु एक बहेलिए के तीर के लगने से हुई थी। युद्ध के बाद जब यदुवंशियों के कुल का नाश हो गया था तब कृष्ण जंगल में चले गए थे, जहां वे विश्राम कर रहे थे तभी बहेलिए ने उनके पैर को देखकर हिरण समझा और तीर मार दिया।
कृष्ण जन्म के दौरान आठ अंक का महत्व...
कृष्ण जन्म : पुराणों अनुसार आठवें अवतार के रूप में विष्णु ने यह अवतार आठवें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के अट्ठाईसवें द्वापर में श्रीकृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से आठवें पुत्र के रूप में मथुरा के कारागार में जन्म लिया था। उनका जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के सात मुहूर्त निकलने के बाद आठवें मुहूर्त में हुआ।
तब रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि थी जिसके संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5125 वर्ष पूर्व) को हुआ हुआ। ज्योतिषियों अनुसार रात 12 बजे उस वक्त शून्य काल था।
कृष्ण जन्म के दौरान आठ का जो संयोग बना उसमें क्या कोई रहस्य छिपा है। गौरतलब है कि कृष्ण की आठ ही पत्नियां थी। आठ अंक का उनके जीवन में बहुत महत्व रहा है।
महाभारत युद्ध हुआ तब कृष्ण की उम्र क्या थी,
कृष्ण पर शोध : हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाले शोधकर्ता ने खगोलीय घटनाओं, पुरातात्विक तथ्यों आदि के आधार पर कृष्ण जन्म और महाभारत युद्ध के समय का सटीक वर्णन किया है। ब्रिटेन में कार्यरत न्यूक्लियर मेडिसिन के फिजिशियन डॉ. मनीष पंडित ने महाभारत में वर्णित 150 खगोलीय घटनाओं के संदर्भ में कहा कि महाभारत का युद्ध 22 नवंबर 3067 ईसा पूर्व को हुआ था।


इतिहासकार मानते हैं रावली पर्वत पर ही कहीं वैकुंठ लोक बसाया गया था।
कृष्ण महायोगी थे। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने वेद और योग की शिक्षा और दीक्षा उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में रहकर हासिल की थी। कृष्ण के पास सुदर्शन चक्र था जिसे युद्ध में सबसे घातक हथियार माना जाता था।
कृष्ण ने एक ओर जहां अपनी माया द्वारा माता यशोदा को अपने मुंह के भीतर ब्रह्मांड के दर्शन करा दिए थे वहीं उन्होंने युद्ध के मैदान में उन्होंने अर्जुन को अपने विराट स्वरूप का दर्शन कराकर उसका भ्रम दूर किया था। दूसरी ओर उन्होंने द्रौपदी के चीरहरण के समय उसकी लाज बचाई थी। इस तरह कृष्ण के चमत्कार और माया के कई किस्से हैं।
कर्मों में कुशलता है योग-कृष्ण
वे योग में पारगत थे तथा योग द्वारा जो भी सिद्धियां होती हैं वे स्वत: ही उन्हें प्राप्त थीं। सिद्धियों से पार भी जगत है वे उस जगत की चर्चा गीता में करते हैं। गीता मानती है कि चमत्कार धर्म नहीं है। स्थितप्रज्ञ हो जाना ही धर्म है।
कृष्ण ने किया इन राक्षसों का वध...
कृष्ण लीलाएं : कृष्ण के जीवन में बहुत रोचकता और उथल-पुथल रही है। कंस ने बालक कृष्ण की हत्या करने के लिए पूतना राक्षसी को भेजा था। कृष्ण की माया के आगे पूतना बेबस रही। पूतना के अलावा कृष्ण ने शकटासुर, यमलार्जुन मोक्ष, कलिय-दमन, धेनुक, प्रलंब, अरिष्ट आदि राक्षसों का संहार किया था।
कुछ और बड़े हुए तो मथुरा में कंस का वध कर प्रजा को अत्याचारी राजा कंस से मुक्त करने के उपरांत कृष्ण ने अपने माता-पिता को भी कारागार से मुक्त कराया। कंस का वध कर कृष्ण ने मथुरा को अपना कार्यक्षे‍त्र बनाया। मथुरा पर जरासंध ने कई बार आक्रमण किए। जरासंध ने कालयवन के साथ मिलकर आक्रमण किया तब कृष्ण को मथुरा छोड़कर भागना पड़ा।
महाभारत का युद्ध : कौरवों और पांडवों के बीच हस्तिनापुर की गद्दी के लिए कुरुक्षेत्र में विश्व का प्रथम विश्वयुद्ध हुआ था। कुरुक्षेत्र हरियाणा प्रांत का एक जिला है। मान्यता है कि यहीं भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण इस युद्ध में पांडवों के साथ थे।

18 दिन तक चला महाभारत युद्ध बहुत ही उथल-पुथल भरा रहा। इस युद्ध में कृष्ण ने कोई हथियार नहीं उठाया था लेकिन एक जगह वे मजबूर हो गए थे।
गीता प्रवचन : कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान महाराजा पांडु एवं रानी कुंती के तीसरे पुत्र अर्जुन को जो उपदेश दिया वह गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वेदों का सार है उपनिषद और उपनिषदों के सार को गीता कहा गया है। ऋषि वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे। गीता महाभारत के भीष्मपर्व का हिस्सा है।  


जन्माष्टमी पर करें ये 7 उपाय, लक्ष्मी मेहरबान

हो जाएगी आप पर<.....
1- धनवान बनने के लिए जन्माष्टमी के दिन भगवान
श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं। इसमें
तुलसी के पत्ते अवश्य डालें। इससे भगवान श्रीकृष्ण
जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं।
2- इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान
श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। इस उपाय से
मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और साधक मालामाल
हो जाता है।
3- किसी कृष्ण मंदिर में जाकर तुलसी की माला से नीचे लिखे
मंत्र की 11 माला जप करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण
को पीला वस्त्र व तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
मंत्र- क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरि:परमात्मने
प्रणत:क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:
4- भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबरधारी भी कहते हैं,
जिसका अर्थ है पीले रंग के कपड़े पहनने वाला। इस दिन पीले
रंग के कपड़े, पीले फल व पीला अनाज दान करने से
मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
5- जन्माष्टमी की करीब12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का केसर
मिश्रित दूध से अभिषेक करें तो जीवन में कभी धन
की कमी नहीं आती, तिजोरी हमेशा पैसों से भरी रहती है।
6- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते समय कुछ रुपए
इनके पास रख दें। पूजन के बाद ये रूपए अपने पर्स में रख लें।
इससे आपकी जेब कभी खाली नहीं होगी।
7- जन्माष्टमी को शाम के समय तुलसी को गाय के
घी का दीपक लगाएं और ऊँ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुुए
तुलसी की 11 परिक्रमा करें

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