30.10.16

कुबेर गायत्री मंत्र के लाभ और विवेचन

कुबेर मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥


धन धान्य और समृद्धि के स्वामी श्री कुबेर जी का यह 35 अक्षरी मंत्र है। इस मंत्र के विश्रवा ऋषि हैं तथा छंद बृहती है भगवान शिव के मित्र कुबेर इस मंत्र के देवता हैं। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। इस मंत्र को उनका अमोघ मंत्र कहा जाता है। माना जाता है कि तीन महीने तक इस मंत्र का 108 बार जाप करने से घर में किसी भी प्रकार धन धान्य की कमी नहीं होती। यह मंत्र सब प्रकार की सिद्धियां देने पाने के लिये कारगर है। इस मंत्र में देवता कुबेर के अलग-अलग नामों एवं उनकी विशेषताओं का जिक्र करते हुए उनसे धन-धान्य एवं समृद्धि देने की प्रार्थना की गई है। यदि बेल के वृक्ष के नीचे बैठ कर इस मन्त्र का एक लाख बार जप किया जाये तो धन-धान्य रुप समृद्धि प्राप्त होती है।



धन के लिए केवल लक्ष्मी आराधना ही नहीं
यह आम धारणा है कि समृद्धि के लिए लक्ष्मी उपासना सर्वश्रेष्ठ है। इसलिए ज्यादातर लोग लक्ष्मी आराधना ही करते हैं और यही सर्वप्रचलित है। किंतु इससे इतर एक और महामंत्र मौज़ूद है, जिसकी साधना से मनुष्य अतुलित सम्पत्ति और अक्षय समृद्धि का स्वामी बन सकता है।
मंत्र का आधार श्रद्धा

मंत्र साधना से दुनिया की कोई भी वस्तु हासिल की जा सकती है, इसमें कोई संदेह नहीं है। प्राचीनतम काल से ही यंत्र-मंत्र-तंत्र का प्रयोग अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया जाता रहा है। मंत्र विद्या का आधार सिर्फ श्रद्धा और विश्वास ही नहीं हैं। प्राचीन शास्त्रों में, खासकर वेदों में तो पूरे विस्तार से मंत्रों के विज्ञान को उजागर किया गया है। मंत्रों की चमत्कारी शक्तियों के पीछे मनुष्य की चेतनात्मक शक्ति का प्रभाव तो होता ही है लेकिन साथ जुड़ा होता है सूक्ष्म ध्वनि विज्ञान का गुप्त विधान।
मंत्र शक्ति का उपयोग
मंत्र शक्ति का उपयोग आत्मिक उन्नति में तो होता ही है पर साथ ही इससे कुछ प्रयोगों के जरिये मनुष्य अपनी भौतिक आवश्यकताओं को भी पूरी कर सकता है। यहां हम एक ऐसा ही मंत्रात्मक प्रयोग दे रहे हैं, जिसका विधि-विधान से प्रयोग करने पर व्यक्ति अपनी धन संबंधी जरूरतों को भी शीघ्रता से पूरी कर सकता है।
कुबेर आराधना
हम सभी को समय के साथ बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिये अधिक से अधिक धन-सम्पत्ति की आवश्यकता होती है। इसी वजह से सभी को धन की देवी महालक्ष्मी की कृपा चाहिए। देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव ही हमारी धन संबंधी परेशानियां दूर कर सकते हैं। इनकी कृपा के लिए ध्यान की अजेय शक्ति एक कारगर उपाय हो सकता है। ध्यान सिर्फ श्रद्धा और आस्था की ही बात नहीं है, यह एक विज्ञान है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता।

. कुबेर गायत्री मंत्र


ॐ यक्षा राजाया विद्महे, वैशरावनाया धीमहि, तन्नो कुबेराह प्रचोदयात्॥
यह मंत्र बेहद शक्तिशाली है। इस मंत्र के ध्यान से धन के देवता कुबेर प्रसन्न होते हैं तथा साथ ही देवी लक्ष्मी की भी कृपा मिलने लगती है। इसके सूक्ष्म प्रभावों से गुप्त विधान बदलने लगते हैं और परिस्थितियां ऐसा मोड़ लेती हैं कि आपके जीवन में धन-समृद्धि का आगमन और स्थाई निवास होने लगता है।
हर शक्ति के एक सूक्ष्म देवता
धन-सम्पत्ति पाने का सबसे सटीक उपाय है देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की निष्ठापूर्वक पूजा। धन एक शक्ति है तथा हर शक्ति के एक सूक्ष्म देवता होते हैं। समस्त देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव ऐसे ही एक सूक्ष्म देवता हैं। नीचे दिए गए कुबेर गायत्री मंत्र से कुबेर देव व्यक्ति के अनुकूल होते हैं। तथा कुबेर देवता के प्रसन्न होने पर इंसान को देवी लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होने लगती है।

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