30.10.16

दीवाली पर 600 साल बाद प्रीति और पद्म योग में विराजेंगी महालक्ष्मी





इस बार दीवाली पर 600 साल बाद प्रीति और पद्म योग का संयोग बन रहा है। सायंकाल पड़ने वाले इस संयोग में महालक्ष्मी की स्थापना करने से सुख, समृद्धि व वैभव बढ़ेगा। सर्वश्रेष्ठ फल पाने के लिए विद्यार्थियों, कृषकों व व्यापारियों को आधी रात बाद पड़ने वाले मुहूर्त में महालक्ष्मी की पूजा करनी पड़ेगी।
ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार लग्नेश शुक्र जो कि वैभव का स्वामी है वह धनाभाव में स्वयं विराजित है। यह संकेत दे रहा है कि लक्ष्मी स्थापना व पूजन से धनधान्य में बढ़ोतरी होगी। साथ ही इस साल मंगल प्रधान चित्रा नक्षत्र और गोचर में मंगल की स्थिति शुभ होने के कारण श्रेष्ठ फल देने वाला योग बन रहा है।



दीवाली पर चौघड़िया का मुहूर्तसुबह 7.58 से दोपहर 12.10 बजे तक चर, लाभ व अमृत

दोपहर 1.34 से 2.58 बजे तक शुभ
शाम 5.46 से रात्रि 10.34 बजे तक शुभ, अमृत व चर
शाम 4.45 से 6.25 तक गोधुली बेला
रात्रि 8.21 से 10.34 तक वृषभ लग्न (गृहस्थों के लिए)
रात्रि 10.34 से 12.49 तक मिथुन लग्न (विद्यार्थियों व कृषकों के लिए)
रात्रि 8.14 से 10.52 तक निशीथ काल
रात्रि 10.52 से 1.31 तक महानिशीथ काल
व्यापारियों के लिए बरसाएगा धन
इस साल बरसों बाद रात्रि 3 से सुबह 5.08 बजे तक विरल मुहूर्त बन रहा है। सिंह लग्न के इस मुहूर्त में यदि व्यापारी पूजा करें तो व्यापार दिन दूनी व रात चौगुनी बढ़ता जाएगा। यह मुहूर्त धन बरसाने वाला है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी रात्रि में विचरण करने निकलेंगी और इस दौरान पूजन करने वालों पर अपनी कृपा बरसाएंगी।
धनतेरस पर वैसा ही संयोग जब धनवंतरि प्रकट हुए थे|
ज्योतिषी डॉ. होस्केरे के अनुसार 28 अक्टूबर को पड़ रही कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस पर इस बार वैसा ही संयोग बन रहा है जैसा हजारों साल पहले भगवान धनवंतरि के प्रकट होने के समय बना था।
मान्यता है कि चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र व अमृत योग पर भगवान धनवंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत से भरा चांदी का कलश लेकर प्रकट हुए थे। चूंकि चन्द्र प्रधान का संबंध चांदी से होता है।

इस साल भी चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र व अमृत योग इस धनतेरस को खास बना रहा है। इसके अलावा भाग्येश बुध जो है वह लग्न में सूर्य के साथ होकर बुधादित्य योग बना रहा है जो कि अक्षयता का योग है। इस दिन खरीदे गए सामान अक्षय रहेंगे।
कब क्या खरीदें

वृश्चिक लग्न में देव प्रतिमा, हीरा, स्वर्ण आभूषण व किचन सामान की खरीदारी करें। कुंभ लग्न में हीरा, सोना खरीदें तथा वृषभ लग्न में सोना, चांदी के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा भवन, बुकिंग की जा सकती है। चौघड़िया के अनुसार चर मुहूर्त में स्वर्ण, रत्न, हीरा, देव प्रतिमा, भूमि, भवन की खरीदारी करना उत्तम होगा। लाभ के चौघड़िये में हर तरह का सामान खरीदा जा सकता है।
लग्न समय
वृश्चिक लग्न सुबह 9.48 से 11.53 तक
कुंभ लग्न दोपहर 3.16 से 4.48 बजे तक
वृषभ लग्न रात्रि 8.28 से 10.41 बजे तक
चर शाम 4.18 से 5.45 बजे तक
लाभ रात्रि 8.52 से 10.25 बजे तक
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