15.9.16

दस अंध विश्वास जो विज्ञान-सम्मत नहीं हैं



हमारे समाज में कुछ ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं जिन्हें अंधविश्वास कहा जाता है। हालांकि विज्ञान इस संबंध में रिसर्च कर रहा है और कुछ हद तक वह इन सवालों के जवाब देने में सफल भी हुआ है और कुछ को उसने अंधविश्‍वास मानकर छोड़ दिया। जो लोग अंधविश्वासों को मानते हैं वे डरे हुए ही जीवन गुजार देते हैं, लेकिन साहसी लोग अपनी बुद्धि और समझ पर भरोसा करते हैं।
ढेरों विश्वास या अंधविश्वास हैं जिनमें से कुछ का धर्म में उल्लेख मिलता है और उसका कारण भी, लेकिन बहुत से ऐसे विश्वास हैं, जो लोक परंपरा और स्थानीय लोगों की मान्यताओं पर आधारित हैं। हालांकि इन विश्वासों को अनुभव पर आधारित माना जाता है। इनमें किस हद तक सच्चाई है यह शोध का विषय है।
यहां प्रस्तुत हैं ऐसे 10 अंधविश्वास जिनसे रोज ही आपका सामना होता है या कि जो सीधे-सीधे आपके जीवन को प्रभावित करते हैं और जिनके प्रभाव को भी आपने आजमाया होगा। इन सभी का हिन्दू धर्म से कोई नाता नहीं है।
* बिल्ली का रास्ता काटना, रोना और आपस में दो बिल्लियों का झगड़ना अशुभ है?
-बिल्ली का रास्ता काटना : माना जाता है कि बिल्ली की छठी इंद्री मनुष्यों की छठी इंद्री से कहीं ज्यादा सक्रिय है जिसके कारण उसे होनी-अनहोनी का पूर्वाभास होने लगता है।
मान्यता अनुसार काली बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता है जबकि बिल्ली बाईं ओर रास्ता काटते हुए दाईं ओर जाए। अन्य स्थ‌ित‌ियों में बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ नहीं माना जाता है।
जब बिल्ली रास्ता काटकर दूसरी ओर चली जाती है तो अपने पीछे वह उसकी नेगेटिव ऊर्जा छोड़ जाती है, जो काफी देर तक उस मार्ग पर बनी रहती है। खासकर काली बिल्ली के बारे में यह माना जाता है। हो सकता है कि प्राचीनकाल के जानकारों ने इसलिए यह अंधविश्वास फैलाया हो कि बिल्ली के रास्ता काटने पर अशुभ होता है।
बिल्ली का रोना : बिल्ली के रोने की आवाज बहुत ही डरावनी होती है। निश्‍चित ही इसको सुनने से हमारे मन में भय और आशंका का जन्म होता है। माना जाता है कि बिल्ली अगर घर में आकर रोने लगे तो घर के किसी सदस्य की मौत होने की सूचना है या कोई अनहोनी घटना हो सकती है।
बिल्ली का आपस में झगड़ना : बिल्लियों का आपस में लड़ना धनहानि और गृहकलह का संकेत है। यदि किसी के घर में बिल्लियां आपस में लड़ रही हैं तो माना जाता है कि शीघ्र ही घर में कलह उत्पन्न होने वाली है। गृहकलह से ही धनहानि होती है।
बिल्ली से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
* लोक मान्यता है कि दीपावली की रात घर में ब‌िल्ली का आना शुभ शगुन होता है।
* बिल्ली घर में बच्चे को जन्‍म देती है तो इसे भी अच्छा माना जाता है।
* किसी शुभ कार्य से कहीं जा रहे हों और बिल्ली मुंह में मांस का टुकड़ा लिए हुए दिखाई दे तो काम सफल होता है।
* लाल किताब के अनुसार बिल्ली को राहु की सवारी कहा गया है। जिस जातक की कुण्डली में राहु शुभ नहीं है उसे राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ब‌िल्ली पालना चाहिए।
* लाल क‌िताब के टोटके के अनुसार बिल्ली की जेर को लाल कपड़े में लपेटकर बाजू पर बांधने से कालसर्प दोष से बचाव होता। ऊपरी चक्कर, नजर दोष, प्रेत बाधा इन सभी में ब‌िल्ली की जेर बांधने से लाभ मिलता है।
* यदि सोए हुए व्यक्ति के ‌स‌िर को बिल्ली चाटने लगे तो ऐसा व्यक्ति सरकारी मामले में फंस सकता है।
* बिल्ली का पैर चाटना निकट भविष्य में बीमार होने का संकेत होता है।
* ब‌िल्ली ऊपर से कूदकर चली जाए तो तकलीफ सहनी पड़ती है।
* यदि आप कहीं जा रहे हैं और बिल्ली आपके सामने कोई खाने वाली वस्तु लेकर आए और म्याऊं बोले तो- अशुभ होता है। यही क्रिया आपके घर आते समय हो तो- शुभ होता है।
* कुत्ते के रोने को अशुभ क्यों माना जाता है?
-कुत्ते का रोना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि घर के सामने घर की ओर मुंह करके कोई कुत्ता रोए तो उस घर पर किसी प्रकार की विपत्ति आने वाली है या घर के किसी सदस्य की मौत होगी।
* क्या बंदर का सुबह-सुबह मुंह देखने से खाना नहीं मिलता?-ऐसी मान्यता है कि सुबह-सवेरे बंदर के दर्शन हो जाने के बाद दिनभर खाना नसीब नहीं होता। बंदर से जुड़ी ऐसे कई शुभ और अशुभ मान्यताएं हैं।
* किसी सुनसान स्थान पर पेशाब कर देने से क्या भूत लग जाता है?






-ऐसी मान्यता हैं कि किसी सुनसान या जंगल की किसी विशेष भूमि कर पेशाब कर देने से भूत पीछे लग जाता है। मान्यता अनुसार वहां कोई आत्मा निवास कर रही हो और आपने वहां जाकर पेशाब कर दिया हो तो।
ऐसे में कुछ लोग पहले थूकते हैं फिर पेशाब करते हैं और कुछ लोग कोई मंत्र वगैरह पढ़कर ऐसा करते हैं। जैन धर्म के अनुसार पेशाब करने के बाद कहा जाता हैं कि भगवान शकेंद्रनाथ की आज्ञा से ऐसा किया गया। कुछ लोग यह कहने के बाद पेशाब करते हैं- उत्तम धरती मध्यम काया, उठो देव मैं मूतन आया।
अन्य मान्यता :
* नदी, पूल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते।
* मान्यता अनुसार एकांत में पवित्रता का ध्यान रखते हैं और पेशाब करने के बाद धेला अवश्य लेते हैं। उचित जगह देखकर ही पेशाब करते हैं।
* भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।
बंदर से जुड़े अंधविश्वास :
* जाते वक्त बंदर बाईं ओर दिखे तो- यह शुभता का प्रतीक है। कार्य में सफलता मिलेगी।
* संध्याकाल में यात्रा के लिए निकले और बंदर दिखाई पड़े तो आपकी यात्रा मंगलमय होगी।
* बंदर का दाहिनी ओर तथा बिल्ली का बाईं ओर दिखना शुभ होता है।
कुत्ते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
* मान्यता है कि घर के सामने सुबह के समय यदि कुत्ता रोए तो उस दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। यदि किसी मकान की दीवार पर कुत्ता रोते हुए पंजा मारता दिखे तो समझा जाता है कि उक्त घर में चोरी हो सकती है या किसी अन्य तरह का संकट आ सकता है।
* यदि कोई व्यक्ति किसी के अंतिम संस्कार से लौट रहा है और साथ में उसके कुत्ता भी आया है तो उस व्यक्ति की मृत्यु की आशंका रहती है अथवा उसे कोई बड़ी विपत्ति का सामना करना पड़ सकता है।
* माना जाता है कि पालतू कुत्ते के आंसू आए और वह भोजन करना त्याग दे तो उस घर पर संकट आने की सूचना है।
* आप किसी कार्य से बाहर जा रहे हैं और कुत्ता आपकी ओर देखकर भौंके तो आप किसी विपत्ति में फंसने वाले हैं। ऐसे में उक्त जगह नहीं जाना ही उचित माना जाता है।
* घर से निकलते समय यदि कुत्ता अपने शरीर को कीचड़ में सना हुआ दिखे और कान फड़फड़ाए तो यह बहुत ही अपशकुन है। ऐसे समय में कार्य और यात्रा रोक देनी चाहिए।
* कुत्ता यदि सामने से हड्डी अथवा मांस का टुकड़ा लाता हुआ नजर आए तो अशुभ।
* संभोगरत कुत्ते को देखना भी अशुभ माना गया है, क्योंकि इससे आपके कार्य में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं और परिवार में झगड़ा हो सकता है।
* यदि किसी के दरवाजे पर लगातार कुत्ता भौंकता है तो परिवार में धनहानि या बीमारी आ सकती है।
* मान्यता है कि कुत्‍ता अगर आपके घुटने सूंघे तो आपको कोई लाभ होने वाला है।
* यदि आप भोजन कर रहे हैं और उसी समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो यह बेहद अशुभ होता है।
* क्या सपनों से शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं?
-ज्योतिष लोग सपनों के शुभ और अशुभ फल बताते हैं। इसमें कितनी सच्चाई है यह शोध का विषय हो सकता है, लेकिन यह अंधविश्वास लोगों के बीच बहुत प्रचलित है और लोग इसे मानते भी हैं।
व्यक्ति को अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के सपने आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये हमारे शरीर और मन की अवस्था के अनुसार आते हैं। यदि भारी और ठोस आहार खाया है तो बुरे सपने आने के चांस बढ़ जाते हैं। पेट खराब रहने की स्थिति में भी ऐसा होता है। यदि आपकी मानसिक स्थिति खराब है और नकारात्मक विचारों की अधिकता है तब भी बुरे सपने आते हैं।
* सूर्यास्त के बाद झाडू क्यों नहीं लगाते और झाड़ू को खड़ा क्यों नहीं रखते?



- झाड़ू को हिन्दू धर्म में लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि संध्याकाल और रात में झाड़ू लगाने से लक्ष्मी चली जाती है और व्यक्ति के बुरे दिन शुरू हो जाते हैं। झाड़ू को खड़ा करके रखने पर घर में कलह होती है।
इस मान्यता के कारण लोग रात में झाड़ू नहीं लगाते और झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखते हैं। झाड़ू और पोंछे को घर में प्रवेश करने वाली बुरी अथवा नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट करने का प्रतीक भी माना जाता है।
झाड़ू से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
* कुछ विद्वानों का मानना है कि दिनभर घर में जो ऊर्जा इकट्ठी हो गई है उसे रात में बाहर करना ठीक नहीं।
* खुले स्थान पर झाड़ू रखना अपशकुन माना जाता है इसलिए इसे छिपाकर रखा जाता है। जिस प्रकार धन को छुपाकर रखते हैं उसी प्रकार झाड़ू को भी। वास्तु विज्ञान के अनुसार जो लोग झाड़ू के लिए एक नियत स्थान बनाने की बजाय कहीं भी रख देते हैं, उनके घर में धन का आगमन प्रभावित होता है। इससे आय और व्यय में असंतुलन बना रहता है। आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
* भोजन कक्ष में झाड़ू भूलकर न रखें। मान्यता अनुसार इससे अनाज खत्म होने और इंकम के रुक जाने का डर बना रहता है।
* घर के बाहर दरवाजे के सामने झाड़ू उल्टी करके रखने से यह चोर और बुरी ताकतों से आपके घर की रक्षा करती है। यह काम केवल रात के समय किया जा सकता है। दिन के समय झाड़ू छिपाकर रखना चाहिए ताकि किसी को नजर न आए।
* अगर कोई बच्चा अचानक झाड़ू लगाने लगे तो समझना चाहिए आपके घर में अनचाहा मेहमान आने वाला है।
* घर में नमक मिले पानी से पोंछा लगाने से घर से नकारात्मकता खत्म हो जाएगी। बुरी ताकतें बेअसर हो जाती हैं।
* गुरुवार को घर में पोंछा न लगाएं, ऐसा करने से लक्ष्मी रूठ जाती है। गुरुवार को छोड़कर घर में रोज पोंछा लगाने से लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
* जो लोग किराए से रहते हैं वे नया घर किराए पर लेते हैं अथवा अपना घर बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि आपकी झाड़ू पुराने घर में न रह जाए। मान्यता है कि ऐसा होने पर लक्ष्मी पुराने घर में ही रह जाती है और नए घर में सुख-समृद्घि का विकास रुक जाता है।
बांस को जलाने से क्या वंश नष्ट हो जाता है?
* प्राचीनकाल से ही बांस की उपयोगिता रही है। इससे जहां घर बनते थे वहीं इससे टोकरियां, बिछात और बांसुरियां भी बनाई जाती थीं। बांस मनुष्य जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी माने गए हैं। लोग इनका उपयोग जलाने की लकड़ी की तरह नहीं करें, शायद इसीलिए यह अफवाह फैलाई गई कि बांस जलाने से वंश नष्ट होता है।
बांस प्रतिकूल परिस्थितियों में भी भरपूर वृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं और किसी भी प्रकार के तूफानी मौसम का सामना करने का सामर्थ्य रखने के प्रतीक हैं। यह पौधा अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है।
हालांकि बांसों की रगड़ से कभी-कभी आग लग जाती है तो सारे बांस अपनी ही आग में जल जाया करते थे जिससे बांसों की पहले से ही कमी हो जाती थी। ऐसे में बांसों को बचाना और भी जरूरी हो जाता है। आजकल तो अगरबत्तियों में भी बांस का उपयो‍ग किया जाता है।
* जूते-चप्पल उल्टे हो जाए तो आप मानते हैं कि किसी से लड़ाई-झगड़ा हो सकता है?
-ऐसा माना जाता है कि घर के बारह रखे जूते या चप्पल यदि उल्टे हो जाएं तो उन्हें तुरंत सीधा कर देना चाहिए अन्यथा आपकी किसी से लड़ाई होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा होने से बचने के लिए चप्पल उल्टी हुई है तो एक चप्पल से दूसरी चप्पल को मारकर सीधा रखने का अंधविश्वास है। इसी तरह जूते के साथ भी किया जाता है।
जूते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
* जूते या चप्पल को कई लोग नजर और अनहोनी से बचने का टोटका भी मानते हैं इसीलिए वे अपनी गाड़ी के पीछे निचले हिस्से में जूता लटका देते हैं।
* कुछ लोग मानते हैं कि शनिवार को किसी मंदिर में चप्पल या जूते छोड़कर आ जाने से शनि का बुरा असर समाप्त हो जाता है।
* जूता सुंघाने से मिरगी का दौरा शांत हो जाता है।
बांस से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
* फेंगशुई में लंबी आयु के लिए बांस के पौधे बहुत शक्तिशाली प्रतीक माने जाते हैं। यह अच्छे भाग्य का भी संकेत देता है इसलिए आप बांस के पौधों का चित्र लगाकर उन्हें शक्तिशाली बना सकते हैं।
* जाते समय अगर कोई पीछे से टोक दे या छींक दे तो आप क्यों चिढ़ जाते हैं?



- यदि आप किसी प्रयोजन से जा रहे हैं और कोई टोक दे अर्थात पूछे कि कहां जा रहो? या कहे कि चाय पीकर जाओ या कुछ और कह दे, तो जिस कार्य के लिए आप कहीं जा रहे हैं उस कार्य में असफलता ही मिलेगी।
हालांकि किसी विशेष कार्य के लिए जाते समय गाय, बछड़ा, बैल, सुहागिन, मेहतर और चूड़ी पहनाने वाला दिखाई दे अथवा रास्ता काट जाए तो यह शुभ शकुन कार्य सिद्ध करने वाला होता है।

* किसी दिन विशेष को बाल कटवाने या दाढ़ी बनवाने से परहेज क्यों करते हैं?
-अधिकतर लोग मानते हैं कि मंगलवार, शनिवार को बाल नहीं कटवाना चाहिए और न ही दाढ़ी बनवाना चाहिए। बहुत से लोग गुरुवार के दिन भी ऐसा करने से परहेज करते हैं।
ज्योतिष के अनुसार मंगलवार का खासा मह‍त्व है। यह हनुमानजी का दिन है और मंगलवार का कारक ग्रह हैं मंगल देव। मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह माना जाता है।


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