7.6.16

मुरली -शिव संदेश


शिवमहिमा :- रूहानीमीठा मातपिता बापदादा बन्धुसखासाथी स्वामीमालिक खुदादोस्त बालकवारिस - सतबाप सतटीचर सतगुर सदगुर - मेरेबाबा प्यारेबाबा मीठेबाबा दयालुबाबा कृपालुबाबा शिवबाबा - सत परमपिता परमात्मा शिव - ऊँचे ते ऊँचा बाप - मोस्ट बिलवेड बाप - गोडफादर - सच्चा सच्चा प्रीतम शिवबाबा - शिव साजन - सच्चाबाप सच्चाटीचर सच्चासतगुरु - नोलेजफूल - ज्ञान :- हम आत्मायें सतगुरु के सत्य ज्ञान वाला सत्यस्वरूप - हर कदम श्रीमत लेने वाला सम्पूर्ण सर्वत्यागी - ऊँचे बाप की उंची मत लेते रहने वाला लंबी यात्रा का उंच पद , उंच नम्बर लेने वाला अच्छा पुरुषार्थी - पूरी महेनत वाला - परमपिता परमात्मा की पाठशाला में ब्रह्मा तन से शिवबाबा की मुरली सुनने वाला सदा सुखी ब्राहमण सो देवता - ज्ञान से अपनी अवस्था ज़माने वाला -त्रिकालदर्शी ब्रह्मामुख वंशावली ब्राहमण - प्यारे बाप से वर्सा लेने वाला राजयोगी - योग :- हम आत्मायें योग का चार्ट वाला यादस्वरूप सम्पूर्णयोगी राजयोगी - गोडफादर प्रीतम साजन की याद वाली ८४ जन्म वाली अशरीर आत्मा हूँ - धारणा :- हम आत्मायें सत्य ज्ञान से सत्य बोलने वाला - सम्पूर्ण श्रीमत वाला बाप पर कुर्बान - सर्वस्व त्यागी - श्रीमत रूपी हाथ को पकड कर हर कदम चलने वाला - सुखधाम का सुखदेव - देहि अभिमानी दिव्य गुणधारी सूर्यवंशी देवता - सेवा :- हम आत्मायें सर्व को सुखशांति देने वाला सुखदेव - श्रीमत पर अपना और सर्व कल्याण करने वाला रूहानी बाप का रूहानी बच्चा - ज्ञान से सर्व को परिस्तानी परिजादा बनाने वाला - शिवसन्देश :- प्रीतम शिवबाबा खुद आकर अपन भक्तों को , अपने बच्चों को बताते है की मैं आता ही हूँ सिर्फ संगमयुग पर एक बार - मेरे आना और जाना उसका बिच है उसको संगम कहा जाता है - और सभी आत्मायें तो बहुत बार जन्म मरण में आती है . मैं एक ही बार आता हूँ - मैं सतगुरु भी एक ही हूँ - बाकि गुरु अनेक है - वह सतगुरु है ही सत बोलने वाला सच्चा सतगुरु - सच्चा बाप सच्चा शिक्षक खुद आकर बताते है की मैं संगमयुग पर आता हूँ - मेरी आयु इतनी ही है , जितना समय मैं आता हूँ - सर्व को पावन बनाकर ही जाता हूँ - जब से मेरा जन्म हुआ , तब से मैं सहज राजयोग सीखना आरम्भ करता हूँ - फिर सिखाकर पूरा करता हूँ तो पतित दुनिया विनाश को पाती है - तब मैं चला जाता हूँ - बस मैं इतना ही समय आता हूँ - शास्त्रों में तो कोई टाइम है नही - शिवबाबा कब जन्म लेते है - कितना दिन भारत में रहते है - यह बाप स्वयं ही बताते है मैं आता ही हूँ संगम पर - संगमयुग की आदि , संगमयुग का अंत गोया मेरे आने की आदि जाने की अन्त - बाकि मध्य में बैठ राजयोग सिखलाता हूँ - बाप खुद बैठ बताते है की मैं ब्रह्मा की वानप्रस्थ अवस्था में आता हूँ ___ पराये देश और पराये तन में , तो महेमान हुआ न - अब फिर देवता बनाने राजयोग सिखला रहा हूँ - मैं भारत में ही आता हूँ - भारत में ही स्वर्ग होता है - आकर त्रिकालदर्शी बनाता हूँ - राजधानी पूरी स्थापना हो जायेगी - बच्चे कर्मातीत अवस्था को पायेंगे तो ज्ञान खत्म हो जायेगा - लड़ाई आरम्भ हो जायेगी - मैं भी अपना पावन बनाने का पार्ट पूरा करके जाऊंगा - देवी देवता धर्म स्थापन करना __ यह मेरा ही पार्ट है - आत्मा का नाम है नही - आत्मा ८४ जन्म लेती है - हर जन्म में नाम रूप देश काल सब बदल जाता है - पाँच तत्वों के अनुसार फीचर्स बदलते जाते है - शिवबाबा है सारी दुनिया का प्रीतम - गोड फादर ही प्रीतम है - अब बाप बैठ ज्ञान को धारण कराते है - कहते है अपने को आत्मा समझ अशरीर हो जाओ - यह ज्ञान है अमुर्त - यह तो मनुष्य को देवता बनाने की पाठशाला है - बाप आया है सब को श्रीमत देने - श्रीमत में ही सर्व कल्याण है - बाप है नोलेजफूल जो बच्चों को नोलेज देते है - बाप कहते है मेरे पास सुख शांति का खजाना है वह बच्चों को ही आकर देता हूँ -  ज्वालापॉइंट :- पवित्र पावन सूर्यवंशी दैवी गुणों गुलदस्ता - सर्व को सुख शांति देने वाला - इच्छा मातरम अविद्या वाला शांत शीतल - श्रीमत पर अपना सर्व का कल्याण करने वाला जलतीज्वाला ज्वालामुखी ज्वालास्वरूप ज्वालाअग्नि ज्वालामूर्त ज्वालाबिंदु - पवित्र पावन परम पूज्य शुद्ध शुभ सात्विक सतोगुणी सतोप्रधान ज्वालामुखी - ज्ञान योग धारणा सेवा श्रीमत बेलेंस फूलस्टॉप में समर्थ सफल समान सम्पन सम्पूर्ण ज्वालामुखी - लाइटहाउस माइटहाउस पावरहाउस सर्चलाइट डीवाइन इनसाइट वाला ज्वालामुखी - स्वीट साइलेंस वाला ज्वालामुखी - आत्मअभिमानी देहिअभिमानी रूहानीअभिमानी परमात्माअभिमानी परमात्मज्ञानी परमात्माभाग्यवान सर्वगुणसम्पन सोलेकलासम्पूर्ण सम्पूर्णनिर्विकारी मर्यादापुरुसोत्तम डबलअहिंसक डबललाइट डबलताजधारी में सम्पन सम्पूर्ण ज्वालामुखी - संतुष्टप्रसन्नखुश - हाइएस्टहोलीएस्टरिचेस्ट - न्याराप्यारानिराला - हेल्दीवेल्दीहेपी - सत्यपवित्रदिव्य पावनपारसपरमपूजनीय - रियलरोयलश्रेष्ठ ज्वालामुखी - पवित्रता सुख शांति आनंद प्रेम ज्ञान गुण शक्ति सम्पत्ति प्राप्ति सिद्धिस्वरूप वालाविजय का विजयीस्वरूप ज्वालामुखी - मगलवार - प्रेम का दिन - प्यार के सागर की सन्तान मास्टर प्यार का सागर - प्रेमस्वरूप प्रेममूर्त - आत्मा देवता पूज्य ब्राहमण फरिश्ता - याद प्यार नमस्ते मुबारक दुआयें वरदान शुभभावना शुभकामना सर्व कल्याण .......

मुरली सार :- ''मीठे बच्चे - यही संगमयुग है जब आत्मा और परमात्मा का संगम (मेल) होता है, सतगुरू एक ही बार आकर बच्चों को सत्य ज्ञान दे, सत्य बोलना सिखाते हैं''
प्रश्न:- किन बच्चों की अवस्था बहुत फर्स्टक्लास रहती है?
उत्तर:- जिनकी बुद्धि में रहता यह सब कुछ बाबा का है। हर कदम श्रीमत लेने वाले, पूरा त्याग करने वाले बच्चों की अवस्था बहुत फर्स्ट क्लास रहती है। यात्रा लम्बी है इसलिए ऊंचे बाप की ऊंची मत लेते रहना है।
प्रश्न:- मुरली सुनते समय अपार सुख किन बच्चों को भासता है?
उत्तर:- जो समझते हैं हम शिवबाबा की मुरली सुन रहे हैं। यह मुरली शिवबाबा ने ब्रह्मा तन से सुनाई है। मोस्ट बिलवेड बाबा हमें सदा सुखी मनुष्य से देवता बनाने के लिए यह सुना रहे हैं। मुरली सुनते यह स्मृति रहे तो सुख भासेगा।
गीत:- प्रीतम आन मिलो...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप द्वारा जो सुख शान्ति का खजाना मिला है वह सबको देना है। ज्ञान से अपनी अवस्था जमाने की मेहनत करनी है।
2) दैवी गुण धारण करने के लिए देहभान को भूल अपने को आत्मा समझ अशरीरी बन एक प्रीतम को याद करना है।
वरदान:- दिलाराम बाप की याद द्वारा तीनों कालों को अच्छा बनाने वाले इच्छा मुक्त भव
जिन बच्चों की दिल में एक दिलाराम बाप की याद है वह सदा वाह-वाह के गीत गाते रहते हैं, उनके मन से स्वप्न में भी ''हाय'' शब्द नहीं निकल सकता क्योंकि जो हुआ वह भी वाह, जो हो रहा है वह भी वाह और जो होना है वह भी वाह। तीनों ही काल वाह-वाह है अर्थात् अच्छे ते अच्छा है। जहाँ सब अच्छा है वहाँ कोई इच्छा उत्पन्न नहीं हो सकती क्योंकि अच्छा तब कहेंगे जब सब प्राप्तियाँ हैं। प्राप्ति सम्पन्न बनना ही इच्छा मुक्त बनना है।
स्लोगन:- संस्कारों को ऐसा शीतल बना लो जो जोश वा रोब के संस्कार इमर्ज ही न हों।

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