7.6.16

दर्द के रिश्ते -कहानी

दर्द के रिश्ते

लेखक- हर्ष महाजन 
ये कहानी दर्शाती है की इंसान चाहे किसी भी मज़हब का हो, अमीर हो , गरीबी हो, इंसान तो इंसान ही है और उससे ऊंची है इंसानियत जो रिश्तों को कायम करती है इंसानियत और प्यार वो कड़ियाँ हैं जो सब रिश्तों से सब मजहबों से ऊपर है और यही इस दुनिया को कायम रखे हुए है | कहानी एक ऐसे पात्र की है जिसने कभी भूले से भी किसी को भी दुःख नहीं पहुँचाया | परन्तु भाग्य ने उसके भाग्य में सारे दुःख लिख दिए थे | राज मेहता , अपनी पत्नी विम्मी, माँ एवं दो अच्छों साक्षी व् शिखा के साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है | राज मेहता एक सफल बिजनस में है और घर में सभी प्रकार की सम्पन्नता मौजूद है |


राज मेहता के एक जिगरी दोस्त अमज़द बेग की बिन ब्याई पत्नी थी अंजना बेग | अमजद बेग दस साल पहले एक्सीडेंट में मारा गया था | मरते-मरते अंजना बेग की ज़िम्मेदारी राज को सौंप गया था | अमजद बेग के देहांत के समय अंजना बेग गर्भवती थी | राज ने अपने दोस्त को दिए वचन को निभाने के लिए अंजना बेग को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई | यहाँ तक कि उसके बच्चे के स्कूल के दाखिले के समय उसे अपना नाम तक दिया |
एक बार अंजना बेग का लड़का इमरान जो की देहरादून के किसी स्कूल में पढता था | छुट्टियों में अपनी माँ से मिलने के लिए आना चाहता था और उसे लेने के लिए राज़ अपनी पत्नि मिनी से यह कह कर वह किसी ज़रूरी काम से बाहर जा रहा है | इमरान को लेकर अंजना के पास आता है लेकिन अचानक इमरान की तबियत खराब हो जाती है | उसके ईलाज की वजह से परेशान राज कई दिनों तक अपने घर संपर्क नहीं कर पाटा | लेकिन इस बीच वह लगा तार अपने आफिस जाता रहता है |
उसकी कोई सूचना न मिलने के कारण परेशान मिनी एक दिन आफिस चली जाती है | और उसे पता चलता है कि राज़ मेहता इसी शहर में है और रोज़ आफिस अ रहा है | अचानक मिनी की चाकर आते हैं और वह गिर पड़ती है |
इस घटना के बाद विन्नी की तबीअत लगातार गिरती जाती है | विम्मी को चेक अप के लिए डॉ के पास ले जाया जाता है जहां पता चलता है कि उसे ब्रेन ट्यूमर है | काफी ईलाज के बावजूद विम्मी बाख नहीं पाती और एक दिन उसका देहांत हो जाता है | उसके देहांत के बाद राज़ काफी टूट सा जाता है | उसके दोनों बच्चों के चेहरे से हंसी समाप्त हो जाता है | बच्चों का चेहरा और राज़ की हालत देखकर उसकी माँ उसे दूसरी शादी के लिए कहती है जिसके लिए वह राजी नहीं होता \| दूसरी तरफ अंजना बेग तराज़ से साफ़-साफ कहती है कि वह क्यूँ नहीं उस से शादी कर लेता ? जबकि उसने सिवाय अपनी रातों के वो सभी हक दे रखे हैं जो एक पत्नि को मिलने चाहिए | राज इसके लिए राजी नहीं होता और अपनी माँ की धार्मिक कट्टरता का वास्ता देता है | अपनी मान के काफी जिद्द करने के बाद राज शादी करने के लिए राजी हो जाता है और उसकी शादी आशा नाम की लड़की से हो जाती है जो एक गरीब परिवार से है | आशा एक सुशील लड़की है और नए घर में आते ही वह सारे घर अपना जादू कर देती | बच्चे शुरू में तो थोडा झिझकते हैं परन्तु बाद में वे भी उसे इस हद तक चाहने लगते वे एक दुसरे के बिना नहीं रह पाते |
आशा की छोटी बहिन मंजू जो कालेज में पढती है , की दोस्ती कुछ आवारा लड़कों के साथ है | जिस वजह से आशा उसे काफी डांटती रहती है | मंजू का एक दोस्त है विक्की , जो ऐयाश और बदमाश किस्म का लड़का है |


मंजू एक बार अपनी बहिन आशा के यहाँ आती है | जहाँ वह अपनी चुलबुली बातों से हंसी का माहौल बनाती है जिस कारण वह सकी चहेती बन जाती है | मंजू वापिस आकर वहाँ इ सब बातें अपने दोस्त विक्की को बताती है | उसकी बातें सुन कर विक्की राज के दोनों बच्चों को अगवाह करने की एक योजना बताता है लेकिन इसका पता मंजू को नहीं लगने देता |
एक दिन मौका पाकर विक्की दोनों बच्चों को अगवा कर लेता जय और दुसरे शर ले जाता है जहां से करीब एक हफ्ते बाद संपर्क करता है और फिरौती की रकम की मांग करता है | पोलिस अपना जाल बिछाती है और विक्की के साथी को गिरफ्तार कर लेती है | विक्की का साथी ज़हर का केप्सूल खाकर अपनी जान दे देता है | अपने साथी की गिरफ्तारी की खबर सुनकर विक्की घबरा जाता है और यह फैसला करता है कि वह चुपचाप इन दोनों बच्चों को मार देगा और वापिस अपने शहर काला जाएगा | जिस से किसी को उसके इस काले कारनामे की भनक नहीं लगेगी |
विक्की एक दिन दोनों बच्चों को एक रेलवे लाईन पर लिटाकर चाकुओं से गोदकर भाग जाता है | लेकिन शायद भाग्य को कुछ ओर ही मंज़ूर था दोनों बच्चों में जान शेष रह जाती है और उन पर लोगों की नज़र पड जाती है जो समय रहते उन्हें अस्पताल में भरती करवा देते हैं | उनकी स्थिति काफी नाज़ुक थी | उस अस्पताल में राज मेहता की बहिन और उसका पति डॉ थे | वे दोनों ही बच्चों को देखकर पहचान जाते हैं और चौंक जाते हैं | वे राह मेहता को खबर करते हैं | राज और आशा अस्पताल पहुँचते हैं उधर बच्चों की खबर सुनकर अंजना बेग भी अस्पताल पहुँच जाती है | वहाँ डॉ राज से कहते हैं बच्चों की स्थिति बहुत खराब है और “ओ नेहेटिव” ग्रुप खून की ज़रुरत पड़ेगी | उस्ला इन्तिजाम करें | अस्पताल में जितना भी खून था इन बच्चों को दिया जा चूका है | बच्चों की हालत को देखते हुए अस्पतान में मौजूद हर शख्स अपना खून देने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन किसी का भी खुन उनसे मिलान नहीं करता | स्थिति काफी खराब हो जाती है | तभी अंजना बेग कुछ फैसला करती है और राज से कहती है कि खून की वजह से उसके बच्चे नहीं मरेंगे | वह वहाँ से इमरान के स्कूल फोन करती है और प्रिंसिपल से इमरान को फ़ौरन अस्पताल भेजने के लिए कहती है | इमरान के पहुँचने से पहले ही साखी मृत्यु हो चुकी थी | साखी की लाश को देखते ही आशा के मुँह से एक चीख निकलती है और चीख के साथ आशा साक्षी की लाश पर ढेर हो जाती है और प्राण त्याग देती है |
तभी स्कूल का प्रिंसिपल इमरान को लेकर अस्पताल पहुँचता है | अंजना इमरान को लेकर आपरेशन थियेटर के बाहर पहुँचती है और डॉ श्रीवास्तव को इमरान का खून चेक करने के लिए कहती है | इमरान का खून मैच कर जाता है और इमरान अपना खून शिखा को दे देता है |
खून देने के बाद जब इमरान आपरेशन थियेटर से बाहर आता है उस समय अंजना बेग नमाज पढती हुई दुआएं मांग रही होती है | इमरान पीछे से अंजना के कंधे पर हाथ रख कर कहता है अम्मीजान मैं आ गया | और उसे शिखा के ठीक होने का समाचार सुनाता है और पूछता है -“माँ , मैंने किसे खून दिया है” | उसकी बात सुनकर माँ उसे सीने से लगाकर कहती है, “बेटा यह तेरी अनकही बहिन है “ | जिसे तूने ज़िंदगी दी है |

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