22.3.16

गीता के उपदेश /भाग -3


गीतोपदेश भाग -3

*मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो मुझमे समाये  हुए हैं और मुझे प्रेम करते हैं |
*भगवान सभी जगह में हैं सभी के उपर हैं |
*सभी अच्छे कार्यों को एक तरह रखकर भगवान की भक्ति में लीन हो जायेंगे तब मैं आपको सभी पापो से मुक्त कर दूंगा |आपको इसकी चिंता की जरूरत नहीं |

*जो खुद पर विश्वास करते हैं वो किसी भी चीज के लिए भगवान के अलावा किसी पर आश्रित नहीं होते |
*मेरी दृष्टि सभी प्राणियों पर समान रूप से रहती हैं ना किसी पर ज्यादा ना कम | लेकिन जो मुझसे प्रेम करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और में उनके जीवन में |
*हे अर्जुन ! केवल कुछ ही भाग्यशाली योद्धा होते हैं जिन्हें ऐसे धर्म के लिए लड़ने का मौका मिलता हैं जो सीधे स्वर्ग का द्वार खोलते हैं |
*आपके विशाल स्वरूप में ना शुरुवात न मध्य ना अंत देखा जा सकता हैं
*मेरी कृपा से जो मुझमे लीं होता हैं उसे तब आत्मीय संतोष मिलता हैं भले ही उसने अपने सारे कर्म किये हो |
*किसी और का काम श्रद्धा से करने से कई गुना अच्छा हैं कि अपना कार्य पूरी लग्न के साथ करें |
/*एक बुद्धिमान व्यक्ति को जीवन का सुख कामुकता से नहीं मिलता |

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