22.3.16

गीतोपदेश भाग -2




भाग -  2 
*सम्मानित व्यक्ति के लिए उसका अपमान मृत्यु से ज्यादा बुरा हैं क्यूंकि दुनिया अपमान की ही बात करेगी |
*व्यक्ति जो चाहे वो बन सकता हैं अगर वो अपने लक्ष्य पर पुरे विश्वास के साथ काम कर रहा हैं तो |
*हर व्यक्ति का अपने निज अनुसार विश्वास बनता हैं |
*अशांत मन को काबू में करना बहुत मुश्किल हैं लेकिन बार- बार कोशिश करने पर यह किया जा सकता हैं |
*सृजन पहले से उपस्थित वस्तु का एक प्रक्षेपण हैं |

*जो जन्मा हैं उसकी मृत्यु निश्चित हैं, जो मारा हैं उसका जन्म निश्चित हैं इसलिए इस सत्य का दुःख मनाना व्यर्थ हैं |
*बुद्धिमान व्यक्ति को, बुद्धिविहीन व्यक्ति जो कि कर्म के फलो की चिंता में लगा हुआ हैं उसके दिमाग को कमज़ोर नहीं करना चाहिये |
*अव्यवहारिक कार्य बहुत ज्यादा तनाव उत्पन्न करता हैं |
*जो वास्तविक नहीं हैं उससे मत डरों,वो ना कभी था और ना कभी होगा | और जो वास्तविक हैं वो हमेशा था और उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता |
*दिव्य पुरुष अथवा स्त्री के लिए कचरे का ढेर, पत्थर और सोना सब समान हैं |
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