20.5.18

गौङ वंश के गोत्र-प्रवरादि

गौङ वंश के गोत्र-प्रवरादि


वंश – सूर्य वंश
गोत्र — भारद्वाज
प्रवर तीन – भारद्वाज,बाईस्पत्य, अंगिरस
वेद – यजुर्वेद
शाखा – वाजसनेयि
सूत्र – पारस्कर
कुलदेवी – महाकाली
इष्टदेव – रुद्रदेव
वॄक्ष – केला
गौड़ वंश
वंश- सूर्यवंश
गौत्र- भारद्वाज
प्रवर तीन- भारद्वाज, बाईस्पत्य, अंगिरस
वेद- यजुर्वेद
शाखा- वाजसनेयी
सूत्र- पारस्कर
कुलदेवी- महाकाली
इष्ट देव- रूद्रदेव
वृक्ष- केला
गृहदेवी- नारायणी माता
भैरव- गया-सुर
नदी- गिलखा
तालाब- गया-सागर
गढ़- पहला बंगाल, दुसरा गढ़ अजमेर
गुरू- वशिष्ठ
किले की देवी- महादुर्गा
ढाल- आशावरी
तलवार- रंगरूप
बन्दुक- संदाण
तोप- कट्कबिजली
कटार- रणवीर
छुरी- अस्पात
ढोल- जीतपाल
नंगारा- रणजीत
घाट- हरीद्वार
तीर्थ- द्वारिका
भाट- करणोत
चारण- मेहसन
ढोली- डोगव
बलाई- भाटियो
नाई- लिलडि़यो

18.5.18

नींबू के चमत्कारिक टोटके // Wonderful tricks of lemon

                                                
    यह आस्था और अंधविश्वास का मामला है। बहुत से लोग नींबू का उपयोग किसी तांत्रिक कर्म के लिए करते हैं लेकिन नींबू के सात्विक उपयोग भी होते हैं। यहां नींबू के केवल सात्विक प्रयोग की बताए जाएंगे जो कि समाज में प्रचलित है।
स्वास्थ्य की दृष्ठि से नींबू बहुत ही लाभदायक होता है। लेकिन नींबू में आपके संकट दूर करने की क्षमता भी है और यह नींबू आपको मालामाल भी बना सकता है। तो जानिए नींबू के 10 चमत्कारिक टोटके-
वास्तु दोष मिटाएं नींबू : 
जिस घर में नींबू का पेड़ होता है वहां किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा सक्रीय नहीं हो पाती है। नींबू के वृक्ष के आसपास का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है। नींबू का पेड़ घर के वास्तुदोष को दूर कर देता है।
यदि पेड़ नहीं है तो एक नींबू लेकर उसे घर के चारों कोनों में 7 बार घुमाएं और कहीं सुनसान जगह पर ले जाकर उसके चार टुकड़े करके चारों दिशाओं में नींबू का एक एक टुकड़ा फेंककर लौट आएं। लौटते वक्त पीछे मुड़कर न देखें।
व्यापार में लाभ हेतु : 
यदि किसी का व्यापर अच्छे से नहीं चल रहा है तो उसके लिए एक छोटा सा उपाय है। एक नींबू को दुकान या संस्थान की चारों दीवारों पर स्पर्श कराएं।
इसके बाद नींबू को चार टुकड़ों में अच्छे से काट लें और चारों दिशाओं में नींबू का एक एक टुकड़ा फेंक दें। इससे दुकान की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाएगी और व्यापार में लाभ होना शुरू हो जाएगा। यह उपाय कम से कम 7 शनिवार को करें।

नौकरी पाने हेतु : 
एक नींबू के ऊपर चार लौंग गाड़ दें और 'ॐ श्री हनुमते नम:' मंत्र का 108 बार जप करके नींबू को अपने साथ लेकर जाएं। आपका काम अवश्य बन जाएगा।
अगर आपको नौकरी या काम नहीं मिल रहा है और आप मारे-मारे फिर रहे हैं तो एक दागरहित बड़ा नीबूं लें और चौराहे पर बारह बजे से पहले जाकर उसके चार हिस्से कर लें और चारों दिशाओं में दूर-दूर फेंक दें। फलस्वरूप बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाएगी।

रोग से मुक्ति हेतु : 
यदि घर में कोई व्यक्ति या बच्चा रोगग्रस्त है और काफी दवाईयां लेने के बाद भी सही नहीं हो रहा है तो शनिवार को एक नींबू लेकर रोगी के सिर से 7 बार उल्टा घुमाएं। फिर एक चाकू सिर से पैर तक धीरे-धीरे स्पर्श करते हुए नींबू को बीच से काट दें। दोनों टुकड़े दो दिशा में संध्या समय फैंक दें। यह टोटका किसी जानकार से पूछकर करेंगे तो अच्छा होगा। क्योंकि इसमें समय का विशेष महत्व होता है।
अगर बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है तो तीन पके हुए नींबू लेकर एक को नीला एक को काला तथा तीसरे को लाल रंग कि स्याही से रंग दे। अब तीनों नीबुओं पर एक एक साबुत लौंग गांड दें। इसके बाद तीन मोटी चूर के लड्डू लेकर तथा तीन लाल पीले फूल लेकर एक रुमाल में बांध दें। अब प्रभावित व्यक्ति के ऊपर से सात बार उबार कर बहते जल में प्रवाहित कर दें। ध्यान रहे प्रवाहित करते समय आसपास कोई खड़ा न हो।
बुरी नजर से बचाए नींबू : 
यह उपाय तो आप जानते ही होगे। अक्सर दुकानों में हरी मिर्च के साथ एक नींबू टंगा होता है। जिस तरह एक प्याज टांगने से वह आसपास की गर्मी सोख लेता है उसी तरह नींबू बुरी नजर को सोख लेता है।
माना जाता है कि नींबू का खट्टा और मिर्च का तीखा स्वाद बुरी नजर वाले व्यक्ति की एकाग्रता भंग कर देता है। जिससे वह अधिक समय पर घर या दुकान को नहीं देख पाता है।
बुरी नजर उतारने के लिए : 
यदि किसी बच्चे को या बड़े इंसान को किसी की बुरी नजर लग गई है तो उसके सिर के उपर से पैर तक सात बार नींबू वार लें। इसके बाद इस नींबू के चार टुकड़े करके किसी सुनसान स्थान पर या किसी तिराहे पर फेंक दाएं। नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद पीछे न देखें।

समृद्धि के द्वार खोलने हेतु :
 कई बार व्यक्ति के पास धन की आवक रुक जाती है। समृद्धि के द्वार बंद हो जाते हैं। हर तरह की प्रगति रुक जाती है। ऐसा लगता है कि किसी ने बंधन कर दिया हो। जिस प्रकार रस्सी से बांध देने पर व्यक्ति खुद को असहाय महसूस करता है ऐसा ही आपको महसूस हो रहा है तो यह उपाय आजमाएं।
एक नींबू लें और किसी चौराहे पर जाकर उसे सात बार अपने उपर से वार कर उसे दो भाग में काट लें। एक भाग पीछे की ओर फेंक दें और दूसरा आगे की ओर फेंक कर काम पर चले जाएं या घर आ जाएं।
दूसरा उपाय अपने उपर से एक साबूत नींबू लेकर उसे 21 बार सिर से पैर तक वार कर उसे विपरित दिखाओं में फेंक दें। इसके बाद एक साबूत पानीदार नारियल लें और उसे अपने उपर से 21 बार वार कर उसे किसी देवस्थान पर साबूत का साबूत ही जला दें।
सफलता हेतु : 
कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ एक नींबू एवं 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में पहुंचकर नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमानजी के समक्ष हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके बाद हनुमानजी से सफलता दिलवाने की प्रार्थना करें और नींबू लेकर कार्य प्रारंभ कर दें। इससे आपके कार्य में सफलता की संभावना बढ़ जाएंगी।
भाग्य को चमकाने हेतु : 
एक नींबू लें और उसको अपने सिर के उपर से सात बार वार कर उसके दो टुकड़ें करें। बाएं हाथ का टुकड़ा दाईं तरफ और दाएं हाथ का टुकड़ा बाईं तरफ फेंक दें।

साधारण ब्याज (Simple interest )के सवाल की सरल विधि

Simple interest (Math)


1. मोहन ने सोहन को 2 वर्षो के लिए 600 रु. उधार दिये तथा राम को 4 वर्षो के लिए 150 रु.उधार दिये दोनो से कुल मिलाकर 90 रु. की व्याज प्राप्त हुई यदि व्याज की गणना साधारण व्याज की दर से की गई हो तो व्याज की दर बतायें



2. किसी निश्चित धन पर 4 % प्रतिवर्ष की दर से 4 वर्षो में प्राप्त व्याज उसी रकम को 5 % प्रतिवर्ष की दर 3 वर्षो में प्राप्त व्याज से 80 रु. अधिक है धन ज्ञात करें





3. 5 प्रतिशत वार्षिक व्याज की दर से कोई धन 6 वर्षो में 2613 रु. हो जाता है उसी दर पर कितने वर्षो में ये धन 3015 रु. हो जायेगा





4. किसीराशि का साधारण व्याज मूलधन का 1/9 है तथा वर्षो की संख्या वार्षिक व्याज की दर के बराबर है तो व्याज की दर ज्ञात करो


5. 770 रु. कर्ज 5 वर्ष में चुकता करने के लिए प्रतिवर्ष कितने रु. अदा करने चाहिए यदि व्याज की वार्षिक दर 5% हो





6. कोई धन साधारण व्याज की दर से 10 वर्षो में दुगना हो जाता है व्याज की दर बतायें





7. कोई धन 20 वर्षो में तिगुना हो जाता है तो व्याज की दर बताये





8. अगर व्याज दर 10% के बदले 15 % हो तो दो वर्षो में किसी धन का साधारण व्याज का अंतर 25 रु. होता है तो धन क्या है






9. 5 प्रतिशत व्याज की दर से 3 वर्षो एवं 5 वर्षो में साधारण व्याज का अंतर 80 रु. है तो मूलधन क्या होगा


10. कोई धनराशि 5 वर्षो में स्वयं दुगनी हो जाती है, यह राशि कितने वर्षो में स्वयं की 6 गुना हो जायेगी

औसत (AVERAGE) के सवाल अब कीजिये चुट्कियों में हल

औसत (AVERAGE) के सवाल अब कीजिये चुट्कियों में हल के लिए इमेज परिणाम
औसत (AVERAGE)क्या है?
(Average-Math Short tricks in Hindi for SSC CGL/CHSL/IBPS)
 हम एक उदाहरण द्वारा समझने का प्रयास करते हैं, मान लीजिये कि आपके पास 50 आम हैं और आपको उन्हें 10 लोगों में बांटने को कहा जाता है, तो ज़रा सोच कर बताईये कितने आम प्रत्येक व्यक्ति को मिलेंगे, जी हाँ प्रत्येक व्यक्ति को 5 आम ही मिलेंगे, और यदि व्यक्ति 5 होते तो प्रत्येक को 10 आम मिलते, आपने प्रति व्यक्ति आम की संख्या निकाली, जो आपको मिली आमों की संख्या को लोगों की संख्या से विभाजित करने से, बस यही औसत है बस हमें प्रत्येक व्यक्ति पर राशि या जो भी हो निकालना होता है,
ये बेहद आसान सा टॉपिक है और आप बडे आराम से इसमे अंक प्राप्त कर सकते हैं SSC CGL, Bank PO, IBPS Bank Clerk तथा अन्य परीक्षाओं में इस टॉपिक से 2-3 सवाल सदैव ही पूछे जाते हैं
औसत का मूल सूत्र = आंकडों का योगफल /आँकडों की संख्या
या
कुल राशि = औसत x आँकडों की संख्या
चलिये अब देखें वो प्रश्न जो अक्सर ही प्रतियोगी परीक्षाओं में इस भाग से पूछे जाते हैं
प्रथम तरह केप्रश्न
इस तरह के सवाल बडे ही सरल होते हैं इनमें सिर्फ और सिर्फ संख्याओं से सम्बंधित सवाल आते है, जैसे – कुछ संख्याओं का औसत निकालने को दिया जा सकता है, या औसत दिया होगा और संख्याओं का योग पूछ लिया जायेगा, चलिये अब देखें इस तरह के कुछ सवाल-
1. 1 से 19 तक की संख्याओं का औसत क्या होगा-
इसका सीधा सा सूत्र है- = n+1
 2
= ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ 19+1 =10
2
2. प्रथम 5 सम संख्याओं का औसत निकालो
सूत्र= (n+1)= 5+1= 6
i. परन्तु यदि दिया होता कि विषम संख्याओं का औसत निकालो
तब उत्तर होता = n =5
3. एक प्रकार का प्रश्न होता है जिसमें संख्याओं में बराबर अंतर होता है जिसे क्रमागत संख्याओं की सीरीज़ कहा जाता है, उनका औसत पूछा जाता है
जैसे- 5, 8, 11, 14, 17………47 का औसत निकालो,
इसका औसत निकालने के लिये बडा आसान सा सूत्र है, इसे याद कर लीजिये
प्रथम संख्या + अंतिम संख्या
 2
47+5
2
= 26 उत्तर
4. इसी प्रकार जो प्रश्न पूछे जाते हैं यहाँ सभी के सूत्र उपलब्ध कराये जा रहे हैं उसके बाद हम दूसरे प्रकार के प्रश्न देखेंगे
a. 1 से लेकर n तक सम संख्याओं का औसत
अंतिम सम संख्या + 2
2
* यदि अंतिम संख्या सम है,
परंतु यदि विषम है
तो = अंतिम संख्या + 1
 2एक और प्रकार से आप कर सकते हैं यदि अंतिम संख्या विषम दी हो तो उससे ठीक पहले वाली सम संख्या को ही अंतिम सम संख्या माना जाता है, जैसे यदि अंतिम संख्या 45 दी है तो अंतिम सम संख्या 44 होगी, और औसत 23 होगा,
b. 1 से लेकर n तक विषम संख्याओं का औसत
इस तरह के प्रश्नों में हमें सिर्फ ये ज्ञात करना होता है कि 1 से लेकर n तक विषम संख्याओं की संख्या कितनी है और जैसा कि आप जानते हैं कि विषम संख्याओं का औसत ऐसी स्थिति में उनकी संख्या ही होती है
जैसे- 1 से 9 तक की विषम संख्याओं का औसत निकालो – या – 1 से 10 तक की संख्याओं का औसत निकालो
पहली स्थिति में हमें (9+1) में 2 से भाग देना है और उत्तर आ जायेगा और दूसरी स्थिति में हमें बस 10 को 2 से विभाजित करना है, क्योंकि आधी संख्यायें सम और आधी विषम होती हैं
c. प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का औसत-
(n+1)(2n+1)
 6
(जहाँ “n” अंतिम संख्या है‌)
d. प्रथम प्राकृतिक संख्याओं के घनों का औसतn(n+1)2
4
(जहाँ “n” अंतिम संख्या है‌)

अब देखते हैं दूसरे प्रकार के प्रश्न

1. किसी कक्षा के 30 छात्रों की औसत आयु 14 वर्ष है, यदि एक अध्यापक की भी आयु शामिल कर ली जाये तो औसत आयु 15 वर्ष हो जाती है अध्यापक की आयु ज्ञात कीजिये
इसके लिये एक सामान्य सा सूत्र है और आप इसे बिना सूत्र के मौखिक भी निकाल सकते हैं वो बाद में जानेंगे पहले सूत्र
= नया औसत + सदस्यों की पुरानी संख्या x औसत में वृध्दि
= 15 + 30 x 1
= 45
2. चार व्यक्तियों का औसत वज़न 3 किलोग्राम बढ जाता है यदि 120 किलोग्राम वज़न वाले व्यक्ति के स्थान पर किसी और व्यक्ति को शामिल कर लिया जाता है
ये प्रश्न भी पहले वाले सूत्र से किया जा सकता है
= 120 + 4 x 3
= 132 किलोग्राम
3 . यदि कोई व्यक्ति किसी निश्चित दूरी को X कि0 मी0/ घंटा की रफ्तार से तथा उसी दूरी को Y किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से तय करे तो उसकी औसत चाल क्या होगी ?
इसका सरलतम सूत्र है
2xy
x+yऔर यदि वह तीन विभिन्न चालों से चले(xyz)
तो सूत्र होगा
3 xyz
xy+yz+zx
4. तीन लडकों की औसत आयु 15 वर्ष है यदि उनकी आयु 3:5:7 के अनुपात में है, सबसे छोटे लडके की आयु क्या होगी ? (SSC CGL 2014)
हल:
तीनों लडकों की कुल आयु होगी = 15 x 3 = 45 वर्ष
अब 45 वर्ष को 3 :5 : 7 के अनुपात में विभाजित कर लीजिये आपका उत्तर आ जायेगा
45
3+5+7
45
15
= 3
अब क्युंकि सबसे छोटे लडके की आयु पूछी गयी है इसलिये इसे सबसे छोटे वाले अनुपात से गुणा करेंगे
= 3 x 3 = 9 वर्ष
5. एक कक्षा के 40 छात्रों द्वारा प्राप्त अंको का औसत 86 है यदि 5 सर्वाधिक अंको को निकाल दिया जाये तो औसत एक अंक कम हो जाता है शीर्ष 5 छात्रों के औसत अंक बताइये (SSC CGL 2014)
हल:
सबसे पहले हम अभी अंको का योग निकालेंगे
= 86 x 40 = 3440
अब जो योग उन पाँच अंको को निकालने के बाद बनेगा वह है
= 35 x 85 = 2975
दोनों का अंतर = 3440 – 2975 = 465
ये है उन पाँच अंको का योग, अब इसका औसत निकालेंगे
465
5
= 93 उत्तर
6. चार बहनों की औसत आयु 7 वर्ष है यदि माँ की आयु शामिल कर दी जाये तो औसत आयु 6 वर्ष बढ जाती है तो माँ की आयु होगी (SSC CGL 2014)
हल:
सबसे पहले 4 बहनों की कुल आयु = 7 x 4 = 28
अब जब माँ की आयु शामिल कर ली जाती है तो औसत हो जाता है= 13
तथा कुल लोग = 4 बहन + माँ = 5
इसलिये कुल आयु = 13 x 5 = 65
अत: माँ की आयु = 65- 28 = 37 वर्ष
Short Trick से –
= नया औसत + सदस्यों की पुरानी संख्या x औसत में वृध्दि
= 13 + 4 x 6
= 37 वर्ष
7. किक्रेट के एक खिलाडी का 10 पारियों का कुछ औसत था 11 वीं पारी में उसने 108 रन बनाये तथा इससे उसकी औसत रन संख्या में 6 की बृध्दि हो गई अब उनकी औसत रन संख्या कितनी है
हल-
n वी पारी = 11
बनाये रन= 108
औसत में बृध्दि= 6
अभीष्ट औसत रन संख्या=आखिरी पारी n में बनाये रन -(n-1) x औसत में बृध्दि
=108 – (11-1) x 6
=108-60
= 48 रन

वैष्णव धर्म का इतिहास और महत्‍वपूर्ण तथ्‍य//History of Vaishnavism and important facts

                                                 

     वैष्णव सम्प्रदाय, भगवान विष्णु को ईश्वर मानने वालों का सम्प्रदाय है. वैष्णव धर्म या वैष्णव सम्प्रदाय का प्राचीन नाम भागवत धर्म या पांचरात्र मत है. इस सम्प्रदाय के प्रधान उपास्य देव वासुदेव हैं, जिन्‍हें, ज्ञान, शक्ति, बल, वीर्य, ऐश्वर्य और तेज- इन 6: गुणों से सम्पन्न होने के कारण भगवान या 'भगवत' कहा गया है और भगवत के उपासक भागवत कहलाते हैं. वैष्णव के बहुत से उप संप्रदाय हैं. जैसे: बैरागी, दास, रामानंद, वल्लभ, निम्बार्क, माध्व, राधावल्लभ, सखी और गौड़ीय. वैष्णव का मूलरूप आदित्य या सूर्य देव की आराधना में मिलता है.
वैष्‍णव धर्म या सम्‍प्रदाय से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य:

(1) वैष्णव धर्म के बारे में सामान्य जानकारी उपनिषदों से मिलती है. इसका विकास भगवत धर्म से हुआ है.

(2) वैष्णव धर्म के प्रवर्तक कृष्ण थे, जो वृषण कबीले के थे और जिनका निवास स्थान मथुरा था.

(3) कृष्ण का सबसे पहले उल्लेख छांदोग्य उपनिषद में देवकी के बेटे और अंगिरस के शिष्य के रूप में हुआ.

सम्‍प्रदाय
संस्‍थापक
आजीवक
मक्‍खलिपुत्र
घोर अक्रियवादी
पूरण कश्‍यप
यदृच्‍छावाद
आचार्य अजित
भौतिकवादी
पकुध कच्‍चायन (भौतिक दर्शन)
अनिश्‍चयवादी
संजय वेट्ठलिपुत्र

(4) विष्णु के अवतारों का उल्लेख मत्स्यपुराण में मिलता है.

(5) शास्‍त्रों में विष्‍णु के 24 अवतार माने गए हैं, ले‍कि‍न मत्‍स्‍य पुराण में प्रमुख 10 अवतार माने जाते हैं:
(i) मत्स्य
(ii) कच्‍छप
(iii) वराह
(iv) नृसिंह
(v) वामन
(vi) परशुराम
(vii) राम
(viii) कृष्‍ण
(ix) बुद्ध
(x) कल्कि

(6) 24 अवतारों का क्रम इस तरह है:
(i) आदि परषु
(ii) चार सनतकुमार
(iii) वराह
(iv) नारद
(v) नर-नारायण
(vi) कपिल
(vii) दत्तात्रेय
(viii) याज्ञ
(ix) ऋषभ
(x) पृथु
(xi) मतस्य
(xii) कच्छप
(xiii) धनवंतरी
(xiv) मोहिनी
(xv) नृसिंह
(xvi) हयग्रीव
(xvii) वामन
(xviii) परशुराम
(xix) व्यास
(xx) राम
(xxi) बलराम
(xxii) कृष्ण
(xxiii) बुद्ध
(xxiv) कल्कि
प्रमुख सम्‍प्रदाय, मत एवं आचार्य

प्रमुख सम्‍पदाय
मत
आचार्य
वैष्‍णव सम्‍प्रदाय
विशिष्‍टाद्वैत
रामानुज
ब्रह्मा सम्‍प्रदाय
द्वैत
आनंदतीर्थ
रुद्र सम्‍प्रदाय
शुद्धद्वैत
वल्‍लभाचार्य
सनक सम्‍प्रदाय
द्वैताद्वैत
निम्‍बार्क
(7) वैष्णव धर्म में ईश्वर प्राप्ति के लिए सर्वाधिक महत्व भक्ति को दिया है.
(8) ऋग्वेद में वैष्णव विचारधारा का उल्लेख मिलता है. वैष्‍ण ग्रंथ इस प्रकार हैं:
(i) ईश्वर संहिता
(ii) पाद्मतन्त
(iii) विष्णुसंहिता
(iv) शतपथ ब्राह्मण
(v) ऐतरेय ब्राह्मण
(vi) महाभारत
(vii) रामायण
( viii) विष्णु पुराण

(8) वैष्‍ण तीर्थ इस प्रकार हैं:
(i) बद्रीधाम
(ii) मथुरा
(iii) अयोध्या
(iv) तिरुपति बालाजी
(v) श्रीनाथ
(vi) द्वारकाधीश

(9) वैष्‍णव संस्‍कार इस प्रकार हैं:
(i) वैष्णव मंदिर में विष्णु राम और कृष्ण की मूर्तियां होती हैं. एकेश्‍वरवाद के प्रति कट्टर नहीं हैं.
(ii) इसके संन्यासी सिर मुंडाकर चोटी रखते हैं.
(iii) इसके अनुयायी दशाकर्म के दौरान सिर मुंडाते वक्त चोटी रखते हैं.
(iv) ये सभी अनुष्ठान दिन में करते हैं.
(v) यह सात्विक मंत्रों को महत्व देते हैं.
(vi) जनेऊ धारण कर पितांबरी वस्त्र पहनते हैं और हाथ में कमंडल तथा दंडी रखते हैं.
(vii) वैष्णव सूर्य पर आधारित व्रत उपवास करते हैं.
(viii) वैष्णव दाह संस्कार की रीति हैं.
(ix) यह चंदन का तीलक खड़ा लगाते हैं.

(10) वैष्‍णव साधुओं को आचार्य, संत, स्‍वामी कहा जाता है.
प्रमुख सम्‍प्रदाय, संस्‍थापक और पुस्‍तक

प्रमुख सम्‍प्रदाय
संस्‍थापक
पुस्‍तक
बरकरी
नामदेव
-
श्रीवैष्‍णव
रामानुज
ब्रह्मासूत्र
परमार्थ
रामदास
दासबोध
रामभक्‍त
रामानंद
अध्‍यात्‍म रामायण

17.5.18

शत्रु को भी वश मे करने वाला हवन -मंत्र


मन्त्रः-
“ॐ गणपति वीर बसै मसान, जो मैं माँगो (मंगौ) सो तुम आनु (आन)। पाँच लडुवा सिर सिन्दूर, त्रिभुवन माँगे चम्पे के फूल । अष्ट कुलि नाग मोहु, जो नारी (नौ सौ नाड़ी) बहुत्तरि कोठा मोहु । सभा माहे इन्द्र की बेटी मोहुँ । आवती-आवती स्त्री मोहुँ, जात-जाता पुरुष मोहुँ । डाँबा (डाँवा) अंग बसै नरसिंह जी, वनै क्षेत्रपाल । आवे मार मर करन्ता, सो (सब) जाई हमारे पाँव परन्ता । गुरु की शक्ति, हमारी भक्ति । चलो मन्त्र, आदेश गुरु को ।”
विधिः- पहले ‘हवन’ हेतु समिधा, घृत, शर्करा और गुग्गुल एकत्रित करें । फिर एकान्त कमरे में ‘होम-कुण्ड’ बनाए । सभी वस्तुओं को समुचित विधि से मिश्रित कर रखें । बाद में उक्त मन्त्र द्वारा ३५१ आहुतियाँ दें । ‘हवन’ के प्रभाव से साधक में ऐसी शक्ति का सञ्चार होगा कि उसके आस-पास सभी लोग उसके वश में हो जाएँगे और शत्रु भी वैर-भाव त्याग कर अनुकूल होंगे ।
विशेषः- मन्त्र में दिये गये कोष्ठकों में पाठान्तर हैं । साधक-गण दोनों पाठान्तरों से लाभ उठा सकते हैं

15.5.18

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए - Major ports of india

                                              Major ports of india के लिए इमेज परिणाम
     भारत के तटवर्ती इलाकों में 13 बड़े बंदरगाह और 200 छोटे बंदरगाह हैं। बड़े बंदरगाह केंद्र सरकार और छोटे बंदरगाह राज्‍य सरकारों के अंतर्गत आते हैं।
देश में स्‍थित 13 बड़े बंदरगाह पूर्वी और पश्‍चिमी तटों पर समान रूप से बनाए गए हैं। कोलकाता, पारादीप, विशाखापत्तनम, हल्दिया, चेन्‍नई, एन्‍नोर और तूतीकोरिन बंदरगाह भारत के पूर्वी तट पर स्‍थित हैं, जबकि कोचीन, मंगलौर, मोरमुगाओ, मुंबई, न्हावाशेवा पर जवाहरलाल नेहरू और कांडला बंदरगाह पश्‍चिमी तट पर स्‍थित हैं।
भारत के प्रमुख बंदरगाह -
नाम नदी/समुद्र राज्य/के.शा.प्र.
मुंबई अरबसागर महाराष्ट्र
पारादीप बंगाल की खाड़ी आंद्रप्रदेश, ओडिशा
चेन्नई बंगाल की खाड़ी तमिलनाडु
विशाखापट्टनम बंगाल की खाड़ी आन्ध्र प्रदेश
कांडला कच्छ की खाड़ी गुजरात
मुर्मुगाव अरबसागर गोवा
जवाहरलालनेहरु अरबसागर महाराष्ट्र
कोचीन अरब सागर केरल
इन्नौर बंगाल की खाड़ी तमिलनाडु
हल्दिया कोलकाता-हुगलीनदी पशिम बंगाल
न्यू तूतीकोरिन बंगाल की खाड़ी तमिलनाडु
न्यू मंगलोर अरब सागर कर्नाटक
पोर्टब्लेयर बंगाल की खाड़ी अंडमान निकोबार द्वीप समूह
बंदरगाहों से संबंधित अन्य तथ्य -
भारत में 13 बड़े तथा 200 से अधिक छोटे बंदरगाह है हम यह कुछ प्रमुख बंदरगाह के बारे में जानकारी दे रहे है -
1.मुंबई बंदरगाह
यह एक प्राकृतिक बंदरगाह है जो मुंबई में स्थित है। 
इसे भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह अन्य बंदरगाहों की अपेक्षा अधिक विस्तृत है। 
इस बंदरगाह की क्षमता लगभग 200 टन से अधिक है। 
भारत का सर्वाधिक व्यापार इसी बंदरगाह से होता है।
पश्चिमी तट का सबसे बड़ा प्राकृतिक बंदरगाह।
सर्वाधिक आयात करने वाला बंदरगाह (भारत का 20% व्यापार यही से)।
2.मर्मागोवा बंदरगाह
यह गोवा राज्य में अरब सागर के तट पर स्थित प्राकृतिक बंदरगाह हैं । 
3.न्यू मंगलौर बंदरगाह
न्यू मंगलौर बंदरगाह कर्नाटक राज्य के समुद्र तट पर स्थित है। 
इस बंदरगाह से कद्रमुख की खान से निकला लौह अयस्क निर्यात किया जाता है । 
4.न्हावाशेवा बंदरगाह (जवाहरलाल नेहरू)
यह मुंबई बंदरगाह के निकट ही स्थित है इसका निर्माण मुंबई बंदरगाह का दबाव कम करने के लिए किया गया। 
न्हावाशेवा बंदरगाह देश सबसे आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त बंदरगाह है, 
शुष्क सामाग्री के व्यापार हेतु प्रसिद्ध।
5.विशाखापत्तनम बंदरगाह
यह बंदरगाह देश के पूर्वी तट पर आंध्र प्रदेश के महानगर विशाखापत्तनम में स्थित है । 
यह एक प्राकृतिक एवं गहरा बंदरगाह है। भारत का सबसे गहरा बंदरगाह
यह जहाजों का निर्माण एवं मरम्मत की जाती है। 
यह बंदरगाह अपने कार्यों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता के लिए प्रसिद्ध है। 
6.कांडला बंदरगाह
यह गुजरात राज्य की कच्छ की खाड़ी में स्थित ज्वारीय बंदरगाह है। 
इसके निकट के राज्यों में खनिज तेल, सीमेंट, रसायन, सूती वस्त्र इत्यादि औद्योगो का विकास होने से इसका महत्व बढ़ गया है। 
इस बंदरगाह से भारी मात्रा में कपास, सूती वस्त्र, उर्वरक,कच्चा तेल, पोटास, फास्फेट, नमक आदि का निर्यात किया जाता है।
7.कोच्चि बंदरगाह
यह केरल राज्य में स्थित एक प्राकृतिक बंदरगाह है जिसमें बड़े जहाज भी ठहर सकते हैं। 
कोच्चि बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट का सर्वश्रेष्ठ बंदरगाह माना गया है। 
चाय, कॉफी व मसालों के निर्यात के लिये प्रसिद्ध।
8.कोलकाता बंदरगाह
यह पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित कृत्रिम बंदरगाह है। 
यह पूर्वी तट का सबसे बड़ा तथा भारत का दूसरा बड़ा बंदरगाह है। 
कोलकाता बंदरगाह के दक्षिण में हल्दिया बंदरगाह को विकसित किया गया है ।
9.हल्दिया
कलकत्ता बंदरगाह के दक्षिण में हुगली नदी पर कलकत्ता के भार को कम करने हेतु बनाया गया।
यहां तेलशोधन कारखाना भी हैं।
10.चेन्नई बंदरगाह
भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित यह एक कृत्रिम बंदरगाह है । 
भारत का दूसरा सबसे बड़ा यातायात घनत्व वाला बंदरगाह और भारत का सबसे पुराना कृत्रिम बंदरगाह।
एन्नौर बंदरगाह को चेन्नई बंदरगाह का दबाव कम करने के लिए विकसित किया गया है।
11.पाराद्वीप बंदरगाह
यह भारत के पूर्वी तट के किनारे उड़ीसा राज्य में स्थित है। 
यह कोलकाता तथा विशाखापत्तनम बंदरगाह के लगभग बीच में स्थित प्राकृतिक संरचना का बंदरगाह है। 
इस बंदरगाह से उड़ीसा एवं बिहार के खनिजों का निर्यात किया जाता है तथा मशीनें,उर्वरक,गंधक, इंजीनियरिंग सामान आयत किए जाते हैं।
12.तूतीकोरन बंदरगाह
यह बंदरगाह तमिलनाडु राज्य के दक्षिणी छोर पर स्थित है। 
यहां से नमक,मछली, सीमेंट,लिग्नाइट, तम्बाकू, चावल आदि निर्यात किया जाता है एवं मशीनें,उर्वरक,सूती वस्त्र इत्यादि वस्तुओं का आयात होता है। 
13.पोर्ट ब्लेयर
अंडमान निकोबार। 
2010 में तेरहवें बंदरगाह के रूप में मान्यता

4.5.18

धन वृद्धि के लिए लक्ष्मी मंत्र // Lakshmi Mantra to be Rich




धन बृद्धि के लिये लक्ष्मी मंत्र 

इस सबार  लक्ष्मी मंत्र अपनी आय बढ़ाने के लिए है और यह भी नौकरी प्राप्त करने के लिए व्यापार में मुनाफा बृद्धि के लिये। इस मंत्र बहुत ही सरल है और परिणाम बहुत प्रभावी रहे हैं।  परिणाम प्राप्त करने के लिए पूरी आस्था और भक्ति से  इस मंत्र का अभ्यास करे।

विधि- 

किसी दिन प्रातः स्नान कर उक्त मन्त्र का १०८ बार जप कर ११ बार गाय के घी से हवन करे। नित्य ७ बार जप करे। इससे शीघ्र ही आय में वृद्धि होगी।

मंत्र

ॐ नमः विष्णु-प्रियायैॐ नमः शिव-प्रियायै

ॐ नमः कामाक्षायैह्रीं ह्रीं फट् स्वाहा 


प्रार्थना-विष्णु-प्रिया लक्ष्मीशिव-प्रिया सती से प्रगट हुई कामाक्षा भगवती। आदि-शक्ति युगल-मूर्ति महिमा अपारदोनों की प्रीति अमर जाने संसार। दोहाई कामाक्षा कीदोहाई दोहाई। आय बढ़ाव्यय घटादया कर माई।


30.4.18

Geography-भारत के प्रमुख दर्रे और घाटियाँ// Major Passes and Valleys of India


                                                             
रोहतांग दर्रा
   रोहतांग दर्रा हिमालय का एक प्रमुख दर्रा हैं। रोहतांग दर्रा- भारत देश के हिमाचल प्रदेश में 13,050 फीट/समुद्री तल से 4111 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है 'रोहतांग दर्रा 'हिमालय का एक प्रमुख दर्रा है। रोहतांग इस जगह का नया नाम है। पुराना नाम है-'भृगु-तुंग'! यह दर्रा मौसम में अचानक अत्यधिक बदलावों के कारण भी जाना जाता है। उत्तर में मनाली, दक्षिण में कुल्लू शहर से 51 किलोमीटर दूर यह स्थान मनाली-लेह के मुख्यमार्ग में पड़ता है। इसे लाहोल और स्पीति जिलों का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। पूरा वर्ष यहां बर्फ की चादर बिछी रहती है। राज्य पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष 2008 में करीब 100,000 विदेशी पर्यटक यहां आए थे। यहाँ से हिमालय श्रृंखला के पर्वतों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। बादल इन पर्वतों से नीचे दिखाई देते हैं। यहाँ ऐसा नजारा दिखता है, जो पृथ्वी पर बिरले ही स्थानों पर देखने को मिले. रोहतांग दर्रे में स्कीइंग और ट्रेकिंग करने की अपार संभावनाएँ हैं।
  हर साल यहाँ हजारों की संख्या में पर्यटक इन आकर्षक नजारों का लुत्फ लेने और साहसिक खेल खेलने आते हैं। रोहतांग-दर्रा जाते हुए ब्यास नदी के बाएं किनारे पर एक छोटा सा दर्शनीय गांव है, वशिष्ठ.रोहतांग-दर्रा जाते हुए, मनाली से 12 कि॰मी॰ दूर कोठी एक सुंदर दृश्यावली वाला स्थान है। हर साल यहाँ हजारों की संख्या में पर्यटक इन आकर्षक नजारों का लुत्फ लेने और साहसिक खेल खेलने आते हैं। प्रदूषण की समस्या-: पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण इस क्षेत्र में गाड़ियों की आवाजाही भी बढ़ रही है। यह भी प्रदूषण बढ़ाने में एक कारक सिद्ध हो रही हैं यहाँ के स्थानीय वैज्ञानिक जेसी कुनियाल के मुताबिक पूरे सीजन में 10000 गाड़ियाँ यहाँ से गुजर चुकी होती हैं व्यस्त समय में यहाँ से प्रतिदिन 2000 किलो कचरा निकलता है तो यहाँ के वातावरण को खराब कर रहा है। पर्यावरणविदों के अनुसार अगर स्थिति नहीं बदली तो इस क्षेत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है। 
मौसम की समस्या 
    जब भी बर्फ के कारण इस मार्ग को बंद कर दिया जाता है।[अक्सर नवम्बर से अप्रैल तक].तब इस जिले में रहने वाले लगभग 30 हज़ार निवासी दुनिया से कट जाते हैं। रोहतांग दर्रा बंद होने का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। हेलीकॉप्टर से ही आवागमन संभव हो पाता है और जब मौसम खराब हो तब यह भी संभव नहीं हो पता. अक्सर 5-6 महीने के लिए ऐसी स्थिति हो जाती है, सोचिये वहां जीवन कितनी कठिनाई में गुजरता होगा.उन सभी दिनों राज्य सरकार सब्सिडी पर राशन देती है। यहाँ के लोग मुख्यत आलू मटर की खेती पर अपना गुजारा करते हैं।
                                    

पीर पंजाल दर्रा
   पीर पंजाल दर्रा जम्मू-कश्मीर के दक्षिण-पश्चिम में पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 3,494 मीटर है। यह दर्रा कुलगांव से कोठी हेतु मार्ग उपलब्ध कराता है। जम्मू को श्रीनगर से जोड़ने वाला यह पारंपरिक दर्रा ‘मुग़ल मार्ग’ पर स्थित है। "पीर की गली" के नाम से विख्यात यह दर्रा मुग़ल सड़क के माध्यम से राजौरी और पुंछ के साथ कश्मीर घाटी को जोड़ता है। जम्मू-कश्मीर को घाटी से जोड़ने वाला यह सबसे सरल और छोटा एवं पक्का मार्ग है। 'पीर की गली' में मुग़ल मार्ग का यह उच्चतम बिंदु है, जो 11500 फुट के लगभग है। यहाँ का निकटम शहर सोपियां है, जिसे "सेबों की घाटी" भी कहते हैं।

बुर्जिला दर्रा
बुर्जिला दर्रा जम्मू कश्मीर (भारत) में स्थित है। यह हिमालय के अन्तर्गत आता है। यह दर्रा पाक अधिकृत कश्मीर एवं कश्मीर घाटी को जोड़ता है। इस दर्रे से होकर काशनगर और मध्य एशिया का मार्ग गुजरता है। समुद्र तल से बुर्जिला दर्रा 4,100 मीटर (13,500 फीट) की ऊँचाई पर कश्मीर, गिलगित और श्रीनगर के बीच का एक प्राचीन मार्ग है। यह दर्रा कश्मीर घाटी को लद्दाख के देवसाईं मैदानों से जोड़ता है। बर्फ से ढक जाने के कारण यह शीत ऋतु में व्यापार और परिवहन के लिए बंद रहता है। बुर्जिला दर्रा भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर स्थित है।
                                  
माना दर्रा
माना दर्रा (5,545 मी (18,192 फ़ुट)), भारत चीन सीमा पर स्थित हिमालय का एक प्रमुख दर्रा हैं। इसे माना-ला, चिरबितया, चिरबितया-ला अथवा डुंगरी-ला के नाम से भी जाना जाता है। भारत की तरफ से यह उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के निकट है। माना दर्रा उत्तराखंड के कुमाऊँ श्रेणी में स्थित है। इस दर्रे से होकर मानसरोवर और कैलाश घाटी जाने का मुख्य मार्ग गुजरता है
    माना दर्रा भारत के उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। इसे दुनिया की सबसे ऊँची परिवहन योग्य सड़क भी माना जाता है। शीत ऋतु में यह लगभग 6 महीने बर्फ से ढका रहता है। माना दर्रा, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर माना शहर से 24 कि.मी. और उत्तराखंड में प्रसिद्ध हिन्दू धार्मिक तीर्थ बद्रीनाथ से 27 कि.मी. दूर उत्तर में स्थित है।
गोमल दर्रा
गोमल दर्रा पाकिस्तान में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है। सुलेमान पर्वतमाला के उत्तरी छोर पर 7,500 फुट की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा फ़ोर्ट सैंडमन से 40 मील (लगभग 64 कि.मी.) उत्तर है। यह प्रसिद्ध खैबर दर्रा तथा बोलन दर्रा के बीच में है। गोमल नदी के समांतर का मार्ग, जो मुर्तजा तथा डोमंडी से होता हुआ उत्तरी-पश्चिमी सरहदी सूबे को अफ़ग़ान प्लेटो से जोड़ता है, इसी दर्रे से होकर जाता है। इस हिस्से का यह सबसे पुराना दर्रा है। प्राचीन समय में व्यापारियों के काफिले यहाँ से वस्तु विनिमय तथा क्रय-विक्रय के लिये आवागमन किया करते थे।
लाचा दर्रा
हिमाचल प्रदेश में जास्कर श्रेणियों के मध्य स्थित यह दर्रा मण्डी से लेह जाने का मार्ग प्रदान करता है। यह दर्रा 4,512 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
बनिहाल दर्रा
बनिहाल दर्रा हिमालय का एक प्रमुख दर्रा हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 1अ एनएच1ए इस दर्रे से होकर निकलता है। यही दर्रा कश्मीर घाटी को जवाहर सुरंग के माध्यम से जम्मू के रास्ते शेष भारत से जोड़ता है। बनिहाल दर्रा हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला पर है, जिसे चीरते हुए भारत की सबसे बड़ी सुरंग के रास्ते, जून 2013 में क़ाज़ीगुंड से बनिहाल तक, रेल सेवा शुरु कर दी गयी है।
आफिल दर्रा
आफिल दर्रा कराकोरम श्रेणी में के-2 के उत्तर में लगभग 5306 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह दर्रा लद्दाख को चीन के झिंजियांग (सिकियांग) प्रान्त से जोड़ता है। शीत ऋतु में आफिल दर्रा नवम्बर से मई के प्रथम सप्ताह तक बंद रहता है।
                                               

भोरघाट दर्रा
भोरघाट महाराष्ट्र राज्य में पश्चिमी घाट श्रेणियों में स्थित एक दर्रा है। यह दर्रा अपनी ख़ूबसूरती के साथ-साथ शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यह दर्रा मुम्बई तथा पुणे के बीच का सम्पर्क मार्ग है। भोरघाट दर्रा 'प्लाकड दर्रे' के नाम से भी जाना जाता है। 'प्लाकड' भारत के केरल में स्थित एक नगर का नाम है। इसी कारण से इसे प्लाकड दर्रे का नाम दिया गया। यहाँ का अधिकांश क्षेत्र काफ़ी शांत है, जहाँ दूर-दूर तक सिर्फ़ पेड़-पौधे और झाड़ियाँ ही दिखाई देती हैं। इस दर्रे से गुजरने वाला मार्ग पहाड़ों और ढालों से होकर जाता है। यहाँ से गुजरते समय प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द उठाया जा सकता है। वर्षा के बाद भोरघाट दर्रे का क्षेत्र हरियाली से भर उठता है। यहाँ दूर-दूर तक फैली हरियाली बड़ा ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती है।
बोलन दर्रा
बोलन पाकिस्तान में स्थित एक दर्रा है। बोलन दर्रा क्वेटा एवं पाकिस्तान को खक्खर से जोड़ता है। बोलन दर्रा अफ़गानिस्तान की सीमा से 120 कि.मी. की दूरी पर है। बोलन दर्रे को दक्षिण एशिया में व्यापारियों, आक्रमणकारियों और खानाबदोश जनजातियों के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में भी इस्तेमाल किया गया।
                                         

चुम्बी घाटी
चुम्बी घाटी तिब्बत के शिगात्से विभाग में स्थित एक घाटी है। यह उस स्थान पर स्थित है जहाँ भारत के सिक्किम राज्य, भूटान और तिब्बत तीनों की सीमाएँ मिलती हैं। हालांकि तिब्बत एक ठंडा प्रदेश है, चुम्बी वादी में गर्मियों में मौसम अच्छा होता है और स्थानीय वनस्पतियों में बहुत फूल आते हैं। कूटनीतिक दृष्टि से 3,000 मीटर पर स्थित चुम्बी घाटी का बहुत महत्व रहा है क्योंकि भारत पर तिब्बत से आक्रमण करने का यह एक आसान मार्ग है। 1904 में भारत की ब्रिटिश सरकार ने तिब्बत पर चढ़ाई करके चुम्बी पर नौ महीने का क़ब्ज़ा कर लिया था। ब्रिटिश सरकार के अन्दर चुम्बी को औपचारिक रूप से भारत का भाग बनाने के लिये काफ़ी खीचातानी चली लेकिन अन्त में इसे तिब्बती सरकार के हवाले कर दिया गया। भारत और तिब्बत के बीच के दो महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रे - नाथू ला और जेलेप ला - के एक तरफ़ के मुख चुम्बी वादी में ही खुलते हैं। 1950 के दशक में जनवादी गणतंत्र चीन ने तिब्बत पर क़ब्ज़ा कर लिया और 1990 के बाद नाथू दर्रे और जेलेप दर्रे तक चौड़ी सड़कें बना दी जिस से भारतीय समीक्षकों के अनुसार भविष्य में युद्धस्थिति में यहाँ के रास्ते चीनी सेनाएँ तीव्रता से भारत पर धावा बोल सकती हैं। चुंबीघाटी हिमालय की दक्षिणी ढालों पर समुद्रतट से 9,500 फुट ऊँची यह घाटी (क्षेत्रफल 700 वर्ग मील) भारत को तिब्बत से मिलाती है। इसके पूर्व में भूटान और पश्चिम में सिक्किम हैं। यद्यपि राजनीतिक रूप में यह पहले तिब्बत के और अब चीन के आधिपत्य में है, तथापि भौगोलिक दृष्टि से इसे भारत का अंग हाना चाहिए। इसी मार्ग से 1904 ई. में ब्रिटिश मिशन गया था।
बोमडिल दर्रा
बोमडिल दर्रा अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस दर्रे से होकर तिब्बत जाने का मार्ग गुजरता है।भूटान के पूर्व में अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह दर्रा समुद्र तल से 2217 मीटर (7273 फुट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ता है। प्रतिकूल मौसम और बर्फ़बारी के कारण यह शीत ऋतु में बंद रहता है।

सामान्य विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न - उत्तर

                                      
1. मनुष्य के रक्त चाप को किस धमनी से मापा जाता है?

उत्तर : ब्रैंकियल धमनी।

2. हास्य गैस का रासायनिक नाम है?

उत्तर : नाइट्रस ऑक्साइड।

3. कैल्कुलस के आविष्कारक है?

उत्तर : आइजेक न्यूटन।

4. शकरकंद किसका रूपांतरण है?

उत्तर : जड़।

5. एड्स के विषाणु किसे नष्ट कर देते है ?

उत्तर : लिम्फोसाइट।

6. उंगली के नाखून में विद्यमान प्रोटीन है?

उत्तर : ग्लोबिन।

7. पक्षियों को उड़ने की प्रक्रिया कहलाती है?

उत्तर : ब्रेलिंग।

8. एन्जाइम के प्रोटीन भाग को क्या कहते है?

उत्तर : एपोएन्जाइम।

9. किस हार्मोन को ‘आपातकालिक हार्मोन’ कहते है?

उत्तर : ऐड्रिनलीन।

10. बुद्धि का केंद्र स्थित है?

उत्तर : प्रमस्तिष्क मे।